एग्रीवेट: 30 सितंबर 2026, नई दिल्ली: 2015 के बाद खाद्यान्न उत्पादन में बड़ा उछाल, वार्षिक वृद्धि दर बढ़कर 8.4 मिलियन टन पहुंची: मंत्री शिवराज सिंह चौहान – राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 के दौरान मंगलवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि के विकास से जुड़े आंकड़े साझा किए। उन्होंने कहा कि 2015 के बाद देश के खाद्यान्न उत्पादन की औसत वार्षिक वृद्धि दर बढ़कर 8.4 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई है। उन्होंने बताया कि 1967 से 2014 तक खाद्यान्न उत्पादन की वृद्धि दर करीब 4 मिलियन टन प्रति वर्ष रही, जबकि 2015 के बाद इसमें तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि की विकास यात्रा को तीन चरणों में बांटकर आंकड़े सामने रखे। उनके अनुसार, 1967 से 1995 के दौरान खाद्यान्न उत्पादन की औसत वार्षिक वृद्धि दर 4.1 मिलियन टन रही। 1996 से 2014 के बीच यह घटकर 3.9 मिलियन टन रह गई। वहीं, 2015 के बाद के तीसरे चरण में खाद्यान्न उत्पादन की औसत वार्षिक वृद्धि दर बढ़कर 8.4 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई। यानी इस अवधि में खाद्यान्न उत्पादन की वार्षिक वृद्धि दर पहले के दोनों चरणों की तुलना में काफी अधिक रही।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 1967 से 2014 तक देश में कृषि की औसत विकास दर करीब 3 प्रतिशत रही। वर्ष 2015 के बाद यह बढ़कर 4.5 प्रतिशत हो गई। उनके अनुसार, कृषि की औसत विकास दर में इस तरह 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
चौहान ने बताया कि वर्ष 2025-26 के लिए देश में 362.60 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था। इसके मुकाबले किसानों ने 376.56 मिलियन टन खाद्यान्न का उत्पादन किया। उन्होंने बताया कि 2026-27 के लिए अल-नीनो की परिस्थितियों का वैज्ञानिक आकलन करते हुए देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य 373.93 मिलियन टन रखा गया है। इसमें रबी सीजन के लिए 177.72 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अल-नीनो की आशंका, मानसून में 12 प्रतिशत की असमान कमी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद केंद्र सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मौसम की मार या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में सरकार किसानों के साथ खड़ी है। उन्होंने रबी बुवाई के लिए पर्याप्त खाद, प्रमाणित बीज और जरूरी वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि जिन क्षेत्रों में पानी की कमी है या मिट्टी में नमी कम है, वहां किसानों को अधिक पानी मांगने वाली फसलों से हटाकर दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की बुवाई के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके साथ ही कम पानी और कम समय में तैयार होने वाली फसलों के बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी काम किया जा रहा है। इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के मुद्दे पर किसानों को एकतरफा जिम्मेदार ठहराने की परिपाटी पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के लिए केवल किसानों को खलनायक ठहराना और उन्हें प्रताड़ित करना उचित नहीं है।