कर्नाटक-महाराष्ट्र के सूखे का आकलन करने जाएगी केंद्रीय टीम, कर्नाटक ने मांगे ₹1,852 करोड़—जानें पूरा मामला – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 30 सितंबर 2026, नई दिल्ली: कर्नाटक-महाराष्ट्र के सूखे का आकलन करने जाएगी केंद्रीय टीम, कर्नाटक ने मांगे ₹1,852 करोड़ – केंद्र सरकार कर्नाटक और महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति का जायज़ा लेने के लिए केंद्रीय दल भेजने जा रही है। यह घोषणा केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 28 सितंबर को नई दिल्ली में शुरू हुए रबी अभियान 2026-27 पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के दौरान की।

चौहान ने बताया कि कर्नाटक के लिए केंद्रीय दल 3 अक्टूबर 2026 को राज्य का दौरा करेगा और वहां सूखे से हुए नुकसान का आकलन करेगा। महाराष्ट्र के लिए टीम भेजे जाने की सटीक तारीख फिलहाल तय नहीं हुई है, लेकिन मंत्री ने कहा कि वे स्वयं भी प्रभावित राज्यों का दौरा करेंगे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार चौहान ने कहा, “हम 3 अक्टूबर को कर्नाटक में सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए एक केंद्रीय दल भेजेंगे,” और यह भी जोड़ा कि, “केंद्र सरकार इस स्थिति में राज्यों के साथ मजबूती से खड़ी है।” यह उद्धरण मूल रूप से अंग्रेज़ी में दिया गया था, यहां भावार्थ के साथ प्रस्तुत किया गया है।

कर्नाटक में स्थिति विशेष रूप से गंभीर बताई जा रही है। राज्य सरकार ने पूरे कर्नाटक में सूखा घोषित कर रखा है और मानसून खत्म होते-होते सूखा-प्रभावित तालुकों की संख्या 200 से ऊपर जाने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल 177 तालुकों में सूखा घोषित किया जा चुका है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 23 सितंबर को केंद्र सरकार को पत्र लिखकर कुल ₹3,705.30 करोड़ के सूखा राहत ज्ञापन में से आधी राशि, यानी लगभग ₹1,852 करोड़, बतौर अंतरिम सहायता तुरंत जारी करने का अनुरोध किया। राज्य सरकार का मूल ज्ञापन इससे पहले 10 सितंबर को 101 तालुकों के लिए केंद्र को सौंपा गया था, जिसे बाद में बढ़ते प्रकोप को देखते हुए संशोधित किया गया।

राज्य में सूखे से 40 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फसल नुकसान की आशंका जताई गई है। शोध के समय तक शिवकुमार के इस पत्र पर केंद्र सरकार की तरफ से कोई सार्वजनिक जवाब सामने नहीं आया था।

महाराष्ट्र में भी राज्य के करीब दो-तिहाई हिस्से को सूखा-प्रभावित बताया गया है। मीडिया रिपोर्टों में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश को भी इसी तरह के मौसमी संकट से जूझता बताया गया है, हालांकि इन दोनों राज्यों के लिए केंद्रीय दल भेजे जाने की कोई अलग घोषणा फिलहाल सामने नहीं आई है।

यह जानकारी स्पष्ट किया जाना ज़रूरी है कि केंद्रीय टीम भेजने और कर्नाटक की अंतरिम सहायता मांग से जुड़ी उपरोक्त जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के बजाय स्वतंत्र मीडिया रिपोर्टों (ईटीवी भारत, द स्टेट्समैन, द साउथ फर्स्ट) पर आधारित है; इस विशिष्ट फैसले की कोई अलग PIB प्रेस विज्ञप्ति सीधे तौर पर नहीं मिल सकी।

देश में सूखा राहत की प्रक्रिया आमतौर पर एक तय ढांचे में चलती है। राज्य सरकार पहले सूखा-प्रभावित तालुकों/जिलों को अधिसूचित करती है, फिर नुकसान का आकलन कर केंद्र को ज्ञापन भेजती है।

इसके बाद केंद्रीय दल मौके पर जाकर स्थिति का जायज़ा लेता है और अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय की उच्चस्तरीय समिति को सौंपता है, जिसके आधार पर राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) के दिशा-निर्देशों के तहत अतिरिक्त सहायता राशि तय होती है। कर्नाटक और महाराष्ट्र के मामले में यह प्रक्रिया अभी आकलन के चरण में है, इसलिए अंतिम राशि पर फैसला आने में अभी समय लग सकता है। पिछले वर्षों में भी देखा गया है कि केंद्रीय टीम के दौरे और राज्य के मूल ज्ञापन में मांगी गई राशि के बीच अक्सर अंतर रह जाता है, इसलिए किसान संगठन अक्सर जल्द और पूरी राशि जारी करने की मांग करते रहे हैं।

यह भी गौरतलब है कि 28-29 सितंबर के इसी राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में रबी सीजन 2026-27 के लिए मौसम पूर्वानुमान, उर्वरक उपलब्धता और बीज आपूर्ति जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई, जिसमें कमजोर मानसून वाले राज्यों के लिए विशेष तैयारी पर जोर दिया गया। सूखे से जूझ रहे कर्नाटक और महाराष्ट्र के लिए यह सम्मेलन इसलिए भी अहम रहा क्योंकि आगामी रबी बुआई से पहले ही राहत राशि मिलने की उम्मीद पर किसानों की निगाहें टिकी हैं।

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