एग्रीवेट: मछली पकड़ने का काम करने वाले मुछआरे अपने जमीन, घर और हक के लिए सड़क पर उतर आए हैं. तमिलनाडु के हजारों मछुआ किसानों ने अपने परिवार के साथ पैदल मार्च किया है और सीएम विजय सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और काले झंडे दिखाए हैं. महिलाओं ने टेंट लगाकर धरने पर बैठ गई हैं. यह पूरी लड़ाई 25 एकड़ में नए सचिवालय को बनाए जाने के आदेश के खिलाफ है. मछुआरों का कहना है कि यहां पर सचिवालय बनने से उनका काम प्रभावित होगा और उन्हें विस्थापित किया जा सकता है. इससे समुद्र तक मछुआरों की पहुंच बाधित हो जाएगी और हजारों परिवार इसकी चपेट में आएंगे.
तमिलनाडु में चेन्नई के पट्टिनपक्कम में मछुआरा किसानों ने मंगलवार को विजय सरकार के खिलाफ आंदोलन किया. यह विरोध प्रदर्शन इलाके में एक नए सेक्रेटेरिएट कॉम्प्लेक्स के प्रस्तावित कंस्ट्रक्शन के खिलाफ किया जा रहा है. मछुआ समुदाय के किसान 21 सितंबर से निर्माण को लेकर जारी आदेश के बाद से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. मछुआरों ने इस प्रोजेक्ट के बनने से उनकी पारंपरिक रोजी-रोटी पर पड़ने वाले असर पर चिंता जताई. तमिलनाडु सरकार के सेक्रेटेरिएट प्रोजेक्ट का DMK और AIADMK समेत कई राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ लेफ्ट पार्टियों और VCK समेत इसके सहयोगियों ने भी विरोध किया है.
पट्टिनपक्कम के प्रदर्शनकारी मछुआरों ने मीडिया से कहा कि समुदाय पीढ़ियों से इस इलाके में रह रहा है और काम कर रहा है. हम यहां कई पीढ़ियों से मछली पकड़ रहे हैं. हमें लगा था कि MGR के बाद सीएम विजय मछुआरा समुदाय के दोस्त हैं, लेकिन यहां सेक्रेटेरिएट कॉम्प्लेक्स बनाने का उनका फैसला हमारे लिए एक झटका है. हम उनसे रिक्वेस्ट करते हैं कि सेक्रेटेरिएट के लिए प्रस्तावित 25 एकड़ जमीन पर मछुआरों के लिए घर बनाएं. यह हमारी रोजी-रोटी है. हम कहां जाएंगे? हमें उम्मीद है कि हमारी चिंताएं सीएम तक पहुंचेंगी और जल्द ही अच्छा जवाब मिलने की उम्मीद है.
पट्टिनापक्कम इलाके के 10 से ज्यादा मछली पकड़ने वाले गांवों के मछुआरों ने पहले इस प्रस्ताव का विरोध किया था. प्रोजेक्ट के लिए जारी सरकारी आदेश को वापस लेने की मांग की थी. मछुआ किसानों को चिंता यह भी है कि नए निर्माण के बाद उन्हें विस्थापित किया जाएगा. कई मछली पकड़ने वाले गांवों के प्रतिनिधियों की एक कंसल्टेशन मीटिंग के बाद मछुआरों ने मिलकर मीडिया को बताया और चेतावनी दी कि अगर ऑर्डर वापस नहीं लिया गया तो वे पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे.
मछुआरों के अनुसार सरकार ने पट्टिनपक्कम में 1200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से नया सेक्रेटेरिएट कॉम्प्लेक्स बनाने का प्रस्ताव देते हुए एक ऑर्डर जारी किया था. मछुआरों ने दावा किया कि इस प्रोजेक्ट से मछली पकड़ने वाले समुदायों की रोजी-रोटी पर बुरा असर पड़ सकता है और इलाके में रहने वाले लगभग 20,000 स्कूली बच्चों की जिदगी में रुकावट आ सकती है. मछुआरों ने कहा कि इस इलाके में मुख्यमंत्री का घर होने की वजह से हम पहले से ही अपना काम करने और मछली बेचने में पाबंदियों का सामना कर रहे हैं. अगर यहां सेक्रेटेरिएट बनाया गया, तो हमारी आजादी पर और असर पड़ेगा. उन्होंने यह भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि समुदाय को पुलिस और फिशरीज डिपार्टमेंट से दबाव है.
#देखें | चेन्नई, तमिलनाडु: मछुआरे पट्टिनापक्कम में टीवीके सरकार के प्रस्तावित नए सचिवालय का विरोध कर रहे हैं। घटनास्थल पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है.
मछुआ किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नोचिकुप्पम से मुल्ली कुप्पम तक मछुआरों पर असर पड़ रहा है. जब मुख्यमंत्री स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए सचिवालय क्षेत्र में जाते हैं, तो मत्स्य विभाग हमें मछली पकड़ने नहीं जाने के लिए कहता है. हम पहले से ही पुलिस के काफी दबाव का सामना कर रहे हैं. मछुआरों का कहना है कि प्रस्तावित प्रोजेक्ट से उनके पारंपरिक काम पर और असर पड़ेगा और तटीय बस्तियों में रहने वालों के लिए मुश्किलें पैदा होंगी. उन्होंने मांग की है कि राज्य सरकार यह आदेश वापस ले और उनकी चिंताओं को दूर करे.