एग्रीवेट: 29 सितंबर 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश में दूध की मिलावट पकड़ना होगा आसान, भोपाल में बनी पहली अत्याधुनिक डेयरी लैब; 100+ मानकों पर होगी जांच – मध्यप्रदेश में दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट की जांच अब आसान होने जा रही है। प्रदेश में सहकारिता क्षेत्र की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला बनकर तैयार हो गई है। मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन, भोपाल परिसर में स्थापित इस प्रयोगशाला में आम उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि देश और प्रदेश की खाद्य उत्पादक संस्थाएं भी दूध और दुग्ध उत्पादों का परीक्षण करा सकेंगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार मिलावटी खाद्य पदार्थों पर लगाम लगाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में सहकारी क्षेत्र की यह अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की गई है।
प्रयोगशाला स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप खाद्य सुरक्षा मानकों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। प्रदेश में अब तक दूध और दुग्ध उत्पादों की सटीक जांच एक बड़ी चुनौती रही है। इसी चुनौती को दूर करने के लिए यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला तैयार की गई है। इस प्रयोगशाला के संचालन से दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता की जांच के लिए आधुनिक तकनीक और उपकरणों की सुविधा उपलब्ध होगी।
यह प्रयोगशाला केंद्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ‘नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट’ (NPDD) योजना के तहत वित्तीय सहयोग और मार्गदर्शन से बनाई गई है। इसके निर्माण के लिए भारत सरकार की ओर से 12 करोड़ 40 लाख रुपए का अनुदान दिया गया है। प्रयोगशाला को नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (NABL) और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से मान्यता प्राप्त होगी।
प्रयोगशाला में अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं और जल्द ही जांच की सुविधा भी शुरू हो जाएगी। राज्य स्तरीय केंद्रीय प्रयोगशाला में अत्याधुनिक उपकरणों के माध्यम से दूध और दुग्ध पदार्थों की 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी। इसमें पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटिक्स, हेवी मेटल्स, अफ्लाटॉक्सिन, वसा की शुद्धता, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की जांच शामिल होगी। इसके अलावा यूरिया, आयोडीन, माल्टोज, शुगर, नमक और अन्य प्रकार की मिलावटों की भी जांच की जाएगी।
नई प्रयोगशाला का सीधा फायदा आम नागरिकों के साथ खाद्य उत्पादक संस्थाओं को मिलेगा। आम उपभोक्ता अपने दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट या गुणवत्ता से जुड़ी आशंका होने पर उनकी जांच करा सकेंगे। वहीं खाद्य उत्पादक संस्थाएं भी अपने उत्पादों का परीक्षण करा सकेंगी। प्रयोगशाला के संचालन से राज्य में दूध और दुग्ध उत्पादों की समग्र गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है। साथ ही शुद्धता को लेकर जन-जागरूकता बढ़ेगी और प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।