एग्रीवेट: Saras Mela: गांव की महिलाएं अब सिर्फ घर संभालने तक सीमित नहीं हैं. कोई अपने हाथों से बने सामान बेच रही है, तो कोई खेती-किसानी से जुड़े कामों के जरिए परिवार की आमदनी बढ़ा रही है. स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर कई महिलाएं अपना छोटा कारोबार भी खड़ा कर चुकी हैं. अब इन महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए एक बड़ा लक्ष्य सामने रखा गया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि अब सिर्फ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें करोड़पति दीदी बनाने की दिशा में भी काम करना होगा.
राष्ट्रपति ने गुरुवार, 15 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में राष्ट्रीय सरस मेले का उद्घाटन करते हुए यह बात कही. उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाएं अब केवल सरकारी योजनाओं का फायदा लेने वाली नहीं हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं.
लखपति दीदी ऐसी महिला को कहा जाता है, जो स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अलग-अलग आजीविका के काम करती है और साल में कम से कम 1 लाख रुपये की आमदनी हासिल करती है. इसके लिए महिलाएं खेती, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, सिलाई-कढ़ाई और दूसरे छोटे कारोबार का सहारा ले सकती हैं.
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि पिछले करीब 12 साल में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की संख्या बढ़कर 10 करोड़ से ज्यादा हो गई है. इन समूहों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ महिलाओं को आर्थिक फैसले लेने में भी पहले से ज्यादा सक्षम बनाया है.
राष्ट्रपति का कहना है कि महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए अभी और काम करने की जरूरत है. ऐसा माहौल बनाना होगा, जिससे महिलाएं अपनी कमाई बढ़ा सकें और अपने छोटे कारोबार को बड़े स्तर तक ले जा सकें. यानी महिलाएं सिर्फ अपने और परिवार का खर्च चलाने तक ही सीमित न रहें, बल्कि दूसरों को भी रोजगार दे सकें. उन्होंने डिजिटल सेवाओं और सौर ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी जिक्र किया. इन क्षेत्रों में काम करके गांव की महिलाएं नए हुनर सीख सकती हैं और अपनी कमाई बढ़ाने के नए रास्ते खोज सकती हैं.
महिला स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में प्रभावी तरीके से योगदान दिया है। लगभग 12 वर्षों में इन समूहों से जुड़ी महिलाओं की संख्या बढ़कर 10 करोड़ से भी अधिक हो गई है।
मैं शिवराज सिंह जी से कहना चाहती हूँ कि इनका नाम केवल लखपति दीदी नहीं होना चाहिए, बल्कि आने वाले दिनों में इन्हें करोड़पति दीदी बनाने का लक्ष्य रखना चाहिए और इनका नाम भी करोड़पति दीदी होना चाहिए।
– आदरणीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी
@rashtrapatibhvn
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विजयवाड़ा में आयोजित राष्ट्रीय सरस मेला ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का एक बड़ा मंच है. यहां महिलाएं अपने बनाए सामान सीधे ग्राहकों के सामने रख सकती हैं. इससे उन्हें अपने उत्पादों की पहचान बनाने और ज्यादा लोगों तक पहुंचने का मौका मिलता है. इस मेले में 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की करीब 1,500 महिला उद्यमी 650 से ज्यादा स्टॉल पर अपने उत्पाद प्रदर्शित कर रही हैं. मेला 15 से 31 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है.
ग्रामीण इलाकों में कई महिलाएं हुनर और मेहनत के बावजूद अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक नहीं पहुंचा पातीं. ऐसे में स्वयं सहायता समूह और सरस मेले उनके लिए मददगार साबित हो सकते हैं. अगर महिलाओं को सही प्रशिक्षण, पैकेजिंग, तकनीक और बाजार की सुविधा मिले, तो वे अपने छोटे कारोबार को आगे बढ़ा सकती हैं.
राष्ट्रपति मुर्मू ने जोर दिया कि विकास का फायदा देश के हर गांव और हर घर तक पहुंचना चाहिए. इसके लिए स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करना जरूरी है. लखपति दीदी से करोड़पति दीदी बनने का लक्ष्य भी इसी सोच को आगे बढ़ाता है.