एग्रीवेट: Jharkhand mal Husbandry: रांची के कांके स्थित ऐतिहासिक बेकन फैक्ट्री को आधुनिक तकनीक के साथ दोबारा शुरू करने की तैयारी चल रही है. लंबे समय से बंद इस इकाई के पुनर्जीवन के लिए राज्य सरकार ने ICAR-National Meat Research Institute (NMRI), हैदराबाद के साथ तकनीकी सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाए हैं. मार्च 2026 में राज्य सरकार और ICAR-NMRI के बीच इस संबंध में समझौता भी हुआ था.
कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने फैक्ट्री के निरीक्षण के दौरान इसके पुनर्जीवन में आ रही तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतों की जानकारी ली. NMRI से जुड़े विशेषज्ञों के साथ फैक्ट्री की मौजूदा स्थिति, जरूरी सुधार और आधुनिक सुविधाओं पर भी चर्चा की गई. सरकार का जोर ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर है, जो लंबे समय तक चल सके और बार-बार बंद होने की स्थिति न आए. बेकन फैक्ट्री के पुनर्जीवन को झारखंड के पशुपालन क्षेत्र से भी जोड़ा जा रहा है. NMRI की भूमिका तकनीकी मार्गदर्शन और आधुनिक मीट प्रोसेसिंग तकनीक उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण हो सकती है. इससे पशुपालकों के लिए उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और बाजार तक की व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है.
बंद रहने के लंबे समय के कारण फैक्ट्री की मशीनरी को आधुनिक बनाने की जरूरत है. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, मौजूदा उपकरणों की स्थिति को देखते हुए नई मशीनरी और तकनीकी सुधार की योजना पर काम किया जा रहा है. जून 2026 में NMRI की टीम ने फैक्ट्री का निरीक्षण कर मौजूदा संसाधनों का आकलन किया और आगे के पुनर्जीवन के लिए रोडमैप तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया. सरकार का उद्देश्य फैक्ट्री को आधुनिक, तकनीकी रूप से सक्षम और आर्थिक रूप से टिकाऊ इकाई के रूप में विकसित करना है. इसके लिए विशेषज्ञों की तकनीकी सलाह को आधार बनाया जा रहा है.
आधुनिक तकनीक से फैक्ट्री को मजबूत और टिकाऊ बनाने की तैयारी.
कांके की बेकन फैक्ट्री कभी झारखंड के पशुपालन और मीट प्रोसेसिंग क्षेत्र की महत्वपूर्ण इकाई रही है. अपने बेहतर दौर में यहां तैयार होने वाले पोर्क उत्पाद और सॉसेज ‘Ranbac’ ब्रांड के नाम से बिहार, बंगाल, पूर्वोत्तर और नेपाल तक मांग में रहे थे. फैक्ट्री 1990 के दशक के मध्य से बंद है. पुनर्जीवन की योजना में फैक्ट्री की पुरानी पहचान और ऐतिहासिक विरासत को भी सुरक्षित रखने पर जोर दिया जा रहा है. पुरानी मशीनरी और उपकरणों को संरक्षित कर संस्थान के इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की बात कही गई है. फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों को पहले प्रशिक्षण के लिए डेनमार्क भेजे जाने का भी उल्लेख किया गया है.
बेकन फैक्ट्री के दोबारा शुरू होने से मीट प्रोसेसिंग के साथ पशुपालन और खासकर पिग फार्मिंग से जुड़े लोगों के लिए नए अवसर बनने की उम्मीद है. सरकार का फोकस किसानों और पशुपालकों को बेहतर बाजार, आधुनिक प्रसंस्करण और प्रशिक्षण से जोड़ने पर है. ICAR-NMRI ने भी झारखंड के मीट प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और मानव संसाधन को मजबूत करने में सहयोग की बात कही है. इस पहल का उद्देश्य केवल एक बंद फैक्ट्री को चालू करना नहीं, बल्कि पशुपालन से जुड़े उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन की व्यवस्था को मजबूत करना है. इससे ग्रामीण आजीविका और राज्य के पशुधन क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए नई संभावनाएं बन सकती हैं.