एग्रीवेट: हरियाणा में मवेशियों में लंपी स्किन डिजीज (LSD) फैलने का खतरा बढ़ गया है. भोपाल स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज (NIHSAD) ने राज्य में बीमारी के 10 मामलों की पुष्टि की है. बीमारी के मामले कुरुक्षेत्र, यमुनानगर और भिवानी जिलों में सामने आए हैं. अगस्त और सितंबर में किए गए फील्ड सर्वे के बाद पशुपालन विभाग ने नई एडवाइजरी जारी की है. विभाग ने बीमारी को फैलने से रोकने के लिए जरूरी सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, हिसार स्थित लाला लाजपत राय यूनिवर्सिटी ऑफ वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज (LUVAS) में मवेशियों के सैंपल की शुरुआती जांच की गई थी. इसमें 12 सैंपल लंपी स्किन डिजीज (LSD) से संक्रमित पाए गए थे. इसके बाद इन सभी सैंपल को अंतिम पुष्टि के लिए भोपाल स्थित NIHSAD भेजा गया था. सूत्रों के मुताबिक, इनमें से 10 सैंपल में बीमारी की पुष्टि हुई है. सूत्रों ने इसे गंभीर मामला बताया है.
लंपी स्किन डिजीज (LSD) एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से मवेशियों को प्रभावित करती है. पशु चिकित्सा अधिकारियों के मुताबिक, यह बीमारी इंसानों में नहीं फैलती. हालांकि, इससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान हो सकता है. बीमारी की वजह से पशुओं में दूध उत्पादन कम होना, वजन घटना और बांझपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इससे पशुओं की खाल को भी नुकसान पहुंच सकता है. गंभीर मामलों में पशुओं की मौत का खतरा भी रहता है.
LUVAS के मुताबिक, बीमारी की शुरुआत आमतौर पर तेज बुखार से होती है. इसके बाद 1 से 3 हफ्ते में त्वचा पर सख्त और उभरी हुई गांठें बनने लगती हैं. इनका आकार करीब 0.5 से 5 सेंटीमीटर तक हो सकता है. ये गांठें आमतौर पर सिर, गर्दन, शरीर, थन और पैरों पर दिखाई देती हैं. गंभीर मामलों में बीमारी का असर शरीर के अंदरूनी अंगों पर भी पड़ सकता है.
हरियाणा में लंपी स्किन डिजीज के मामलों के बीच LUVAS ने पशुपालकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. फील्ड जांच में कुछ गंभीर रूप से प्रभावित पशुओं में डिहाइड्रेशन और कमजोरी पाई गई. कुछ पशुओं के शरीर का तापमान 107°F तक दर्ज किया गया. LUVAS के मुताबिक, लंपी बीमारी का वायरस मुख्य रूप से खून चूसने वाले कीड़ों, जैसे मक्खी, मच्छर और टिक के जरिए फैलता है. पशुओं के सीधे संपर्क से बीमारी फैलने का खतरा तुलनात्मक रूप से कम माना गया है.
विश्वविद्यालय ने किसानों को सलाह दी है कि बुखार या त्वचा पर गांठ वाले पशुओं को तुरंत दूसरे पशुओं से अलग करें. नए खरीदे गए पशुओं को भी 15 दिन तक अलग रखने की सलाह दी गई है. इसके अलावा बीमार और उनके संपर्क में आए पशुओं की आवाजाही रोकने, उनके लिए अलग चारा-पानी के बर्तन रखने और पशु शेड को नियमित रूप से सैनिटाइज करने को कहा गया है. स्वस्थ और पात्र पशुओं का सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार टीकाकरण कराने की भी सलाह दी गई है. LUVAS ने किसानों से लंपी बीमारी के संदिग्ध मामलों की जानकारी तुरंत पशु चिकित्सा अधिकारियों को देने की अपील की है.