एग्रीवेट: शिक्षण संस्थानों में बनेंगी एंटी ड्रग समितियां
23 अक्टूबर 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश में तीन साल में खत्म होगा मादक पदार्थों का नेटवर्क – मध्यप्रदेश में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार और तस्करी के पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए राज्य सरकार अगले तीन वर्षों तक विशेष अभियान चलाएगी। इसके तहत सभी संबंधित विभाग समन्वित कार्ययोजना बनाकर कार्रवाई करेंगे। साथ ही, 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में एंटी ड्रग समितियां गठित की जाएंगी। यह निर्णय मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल की अध्यक्षता में गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित पांचवीं राज्य स्तरीय एनसीओआरडी बैठक में लिया गया।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में जिस तरह नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में सफलता मिली है, उसी तरह मादक पदार्थों के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए गंभीरता से काम करना होगा। उन्होंने सभी विभागों को त्रिवर्षीय अभियान के लिए लक्ष्य निर्धारित कर कार्ययोजना बनाने तथा नार्कोटिक्स वर्टिकल, एसआईबी और स्थानीय पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि मादक पदार्थों के विनिष्टीकरण में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है। वर्ष 2026 में 30 सितंबर तक 2,756 प्रकरणों में 1,30,380 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए गए।
मुख्य सचिव ने शासकीय और अशासकीय शिक्षण संस्थानों में नशामुक्त विद्यालय अभियान चलाने के निर्देश दिए। 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में गठित एंटी ड्रग समितियों में शिक्षक, पालक, विद्यार्थी, उच्च शिक्षा विभाग, सामाजिक न्याय विभाग और पुलिस के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
मादक पदार्थों से संबंधित सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखने की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए नार्कोटिक्स हेल्पलाइन नंबर 1933 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश में मादक पदार्थों से संबंधित 811 शिकायतें प्राप्त हुईं। इस अवधि में मध्यप्रदेश पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) ने 18 अवैध मादक पदार्थ प्रयोगशालाओं को ध्वस्त किया।
अवैध कारोबार में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए वर्ष 2025 में 54 प्रकरणों में 300 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2026 में 38 प्रकरणों में 146 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई।
मुख्य सचिव ने सामाजिक न्याय विभाग को निर्देश दिए कि जिन जिलों में नशामुक्ति केंद्र नहीं हैं, वहां 31 अक्टूबर तक प्रस्ताव प्राप्त कर प्रदेश के सभी जिलों में केंद्र स्थापित करना सुनिश्चित किया जाए। वर्तमान में सामाजिक न्याय विभाग के 31 और स्वास्थ्य विभाग के 10 नशामुक्ति केंद्र संचालित हैं।
उन्होंने रासायनिक उद्योगों में मादक पदार्थों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर रसायनों के अवैध इस्तेमाल और डायवर्जन पर रोक लगाने के लिए उद्योग, श्रम, स्वास्थ्य और गृह विभाग को संयुक्त निगरानी तंत्र विकसित करने को कहा। औद्योगिक क्लस्टरों और उद्योग संगठनों की सूची साझा कर नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
कोडीन-आधारित कफ सिरप के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण की निगरानी मजबूत करने तथा लाइसेंस प्रक्रिया को कम्प्यूटरीकृत करने के निर्देश भी दिए गए। इसके अलावा, एनडीपीएस एक्ट के तहत फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) को भेजे गए नमूनों की जांच रिपोर्ट 15 दिन में प्राप्त करने के लिए कार्ययोजना बनाने को कहा गया।
बैठक में बताया गया कि नशामुक्ति अभियान में मध्यप्रदेश देश के शीर्ष दो राज्यों में शामिल है। प्रदेश में मादक पदार्थों के सेवन के विरुद्ध जागरूकता के 30,339 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 2.58 करोड़ लोगों की सहभागिता रही। ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान को सोशल मीडिया पर 58 करोड़ से अधिक व्यूज मिले, जबकि लगभग 10 हजार युवाओं को विभिन्न खेल गतिविधियों से जोड़ा गया।
मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को अभियान की प्रभावशीलता बढ़ाने, सूचना तंत्र मजबूत करने तथा मादक पदार्थों के अवैध कारोबार की जानकारी देने वालों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। बैठक में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, विभागाध्यक्ष तथा नारकोटिक्स और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।