गुलबर्गा तुअर का विदेश में डंका, किसानों को अपनी उपज पर मिल रहा 30 फीसदी से ज्यादा भाव—पढ़ें इनसाइड स्टोरी – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: कर्नाटक के कालाबुरागी यानी गुलबर्गा की मशहूर GI टैग वाली तुअर दाल अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना रही है. इसकी पहली खेप के तौर पर 1 मीट्रिक टन प्रीमियम गुलबर्गा तुअर दाल मालदीव के लिए रवाना की गई है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, यह पहल किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने और उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में अहम कदम है. FPO के जरिए निर्यात होने से किसानों को अपनी उपज पर 30 प्रतिशत से अधिक बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है.

गुलबर्गा तुअर दाल  की पहली खेप 1 मीट्रिक टन की है. इसे FPO के ब्रांड के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया गया है. इससे स्थानीय किसानों को अपनी उपज के लिए पारंपरिक बाजारों की तुलना में बेहतर कीमत हासिल करने का अवसर मिला है. इस तरह FPO किसानों को उत्पादन से लेकर बाजार और निर्यात तक जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. केंद्र सरकार लगातार कृषि उत्पादों को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने पर जोर दे रही है. ऐसे में गुलबर्गा की तुअर दाल का मालदीव निर्यात कर्नाटक के किसानों के लिए नए बाजारों की संभावनाएं खोलता है.

गुलबर्गा तुअर दाल को भौगोलिक संकेत यानी GI टैग  प्राप्त है. APEDA के रिकॉर्ड में Gulbarga Tur Dal को कर्नाटक के GI उत्पादों में दर्ज किया गया है. इसका GI प्रमाणपत्र 14 अगस्त 2019 को जारी हुआ था और इसका भौगोलिक क्षेत्र कर्नाटक दर्ज है. इस दाल की खास पहचान इसके स्वाद और गुणवत्ता से जुड़ी है. गुलबर्गा क्षेत्र की मिट्टी में कैल्शियम और पोटेशियम जैसे खनिजों की मौजूदगी को इसकी विशेषताओं से जोड़ा जाता है. इसके अलावा यह दाल जल्दी पकने के गुण के लिए भी जानी जाती है.

गुलबर्गा तूर दाल मालदीव के लिए प्रस्थान करती है।

जिन किसानों ने अपनी कड़ी मेहनत से इसे संभव बनाया है, उन्हें अपनी उपज के लिए 30% से अधिक कीमत मिलती है… pic.twitter.com/0fD5bkKvtH

इस निर्यात पहल का सीधा फायदा किसानों तक पहुंचने की बात सामने आई है. FPO के जरिए उपज को संगठित  करके अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने से किसानों को 30 प्रतिशत से अधिक बेहतर मूल्य मिल रहा है. इससे किसानों को स्थानीय मंडियों पर निर्भर रहने के बजाय निर्यात बाजार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है. किसानों के लिए बेहतर मूल्य मिलने का मतलब है कि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और बाजार से सीधा जुड़ाव उनकी कमाई बढ़ाने में मदद कर सकता है. इसी मॉडल के जरिए अन्य GI टैग वाले कृषि उत्पादों को भी वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं.

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार  में पहुंचाने से किसानों के लिए नए अवसर तैयार हो रहे हैं. गुलबर्गा तुअर दाल का मालदीव निर्यात इसी दिशा में एक उदाहरण है. APEDA कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बाजार संबंधी जानकारी और निर्यात से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराता है. गुलबर्गा तुअर दाल की यह पहली खेप केवल एक निर्यात consign­ment नहीं, बल्कि स्थानीय किसानों की उपज को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचाने की दिशा में एक कदम है. आने वाले समय में ऐसे निर्यात से GI टैग वाले भारतीय कृषि उत्पादों की विदेशी बाजारों में पहचान मजबूत करने और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के अवसर बढ़ सकते हैं.

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