इंपोर्ट ड्यूटी घटाने से सस्ता होगा खाने का तेल? कीमतों पर क्या पड़ेगा असर.. जानें एक्सपर्ट की राय – एग्रीवेट

Team Agrivate
6 Min Read
इंपोर्ट ड्यूटी घटाने से सस्ता होगा खाने का तेल? कीमतों पर क्या पड़ेगा असर.. जानें एक्सपर्ट की राय - एग्रीवेट - इंपोर्ट ड्यूटी घटाने

एग्रीवेट: केंद्र सरकार के खाने के तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने के फैसले को सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) ने स्वागत किया है. उसने सरकार के इस निर्णय को समय पर उठाया गया संतुलित कदम बताया है. एसोसिएशन के मुताबिक, त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले इस फैसले से घरेलू बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है. इससे रिटेल मार्केट में भी खाने वाला तेल सस्ता हो सकता है.

दरअसल, सरकार ने कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे पाम ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) को 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है. वहीं, रिफाइंड सोयाबीन तेल और रिफाइंड पाम ऑयल पर ड्यूटी 32.5 फीसदी से घटाकर 27.5 फीसदी कर दी गई है. सरकार ने कच्चे सूरजमुखी तेल पर लगने वाली 10 फीसदी BCD को पूरी तरह खत्म कर दिया है. वहीं, रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी 32.5 फीसदी से घटाकर 22.5 फीसदी कर दी गई है. ड्यूटी में ये बदलाव 24 सितंबर से लागू हो गए हैं.

SEA के अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने बिजनेसलाइन से कहा कि ड्यूटी में कटौती को पिछले एक साल में खाने के तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के संदर्भ में देखना चाहिए. उनके मुताबिक, इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों की कीमत करीब 25 फीसदी बढ़ी है, जबकि घरेलू बाजार में कीमतों में 12-15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने कहा कि त्योहारों का सीजन भी नजदीक है. ऐसे में आयात शुल्क में कमी से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ सकता है.

SEA के मुताबिक, सरकार ने खाद्य तेलों पर इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती करते हुए उपभोक्ताओं और घरेलू तेल उद्योग दोनों के हितों का ध्यान रखा है. फिलहाल महंगाई भी सरकार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. CPI महंगाई दर 4.8 फीसदी और खाद्य महंगाई 5.95 फीसदी हो गई है, जो एक महीने पहले 5.52 फीसदी थी. SEA के अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने कहा कि सरकार का तत्काल लक्ष्य उपभोक्ताओं पर बढ़ते महंगाई के बोझ को कम करना है. साथ ही, कच्चे और रिफाइंड तेल के बीच ड्यूटी में अंतर बरकरार रखा गया है. इससे देश की रिफाइनिंग इंडस्ट्री को भी खाद्य तेल की वैल्यू चेन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में मदद मिलेगी.

SEA के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ता है. ऐसे में इंपोर्ट ड्यूटी कम होने से महंगे वैश्विक खाद्य तेलों का असर भारतीय उपभोक्ताओं पर कुछ कम हो सकता है. एसोसिएशन का मानना है कि इस फैसले का असर नेपाल के रास्ते भारत में आने वाले रिफाइंड खाद्य तेलों के आयात पर भी पड़ सकता है.

SEA के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने कहा कि अगर भारत-नेपाल के मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं होता है, तो भारत में इंपोर्ट ड्यूटी कम होने से नेपाल से तेल आयात करने में मिलने वाला कीमत का फायदा घट सकता है. उनके मुताबिक, इससे नेपाल के रास्ते बड़े पैमाने पर रिफाइंड खाद्य तेल भारत भेजने की प्रेरणा कम हो सकती है.

बीवी मेहता ने उम्मीद जताई कि इंपोर्ट ड्यूटी कम होने से आयात की लागत में जो कमी आएगी, उसका फायदा धीरे-धीरे घरेलू बाजार में भी दिखाई देगा. उन्होंने कहा कि भारत में खाद्य तेल की घरेलू जरूरत और उत्पादन के बीच बड़ा अंतर है. इस अंतर को पूरा करने के लिए देश को आयात पर काफी निर्भर रहना पड़ता है. मेहता के मुताबिक, ऐसे में इंपोर्ट ड्यूटी की व्यवस्था स्थिर और संतुलित होना जरूरी है. इससे उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर खाद्य तेल मिल सकेगा. साथ ही, घरेलू तेल रिफाइनिंग उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और लंबे समय में तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को बेहतर प्रोत्साहन मिल सकेगा.

Share This Article
1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *