एग्रीवेट: मॉनसून की बेरुखी से तेलंगाना में सामान्य से 20 फीसदी तक कम बारिश दर्ज की गई है. इससे राज्य के कई इलाकों में सूखा स्थिति गहराती जा रही है. राज्य में 4 लाख एकड़ में खड़ी फसलें भयंकर सूखे की चपेट में हैं और जल्द सिंचाई का पानी नहीं मिला तो फसल सूखकर बर्बाद हो जाएगी. इन फसलों में धान की खेती , कपास और मक्का जैसी प्रमुख फसलें हैं. तमिलनाडु सरकार ने पड़ोसी राज्य कर्नाटक से आग्रह किया है कि कृष्णा नदी का पानी उन्हें दिया जाए. इस संबंध ने शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की है.
सामान्य से बेहद कम बारिश होने के चलते तेलंगाना में खरीफ फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य के 15 जिलों और 266 मंडलों में सामान्य से कम बारिश हुई है. असमय और कम बारिश वितरण से यहां की प्रमुख फसल धान की खेती इस बार लक्ष्य से 24 फीसदी तक कम क्षेत्र में बोई गई है. किसानों लगभग 50 लाख एकड़ में धान की खेती की है, जबकि सरकार ने 65 लाख एकड़ में खेती का लक्ष्य रखा था.
तेलंगाना के पर्यटन मंत्री जुपल्ली कृष्णा राव और सत्तारूढ़ कांग्रेस के कई विधायकों ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से बुधवार को मुलाकात कर निचले तटीय इलाके (तेलंगाना) में फसलों को बचाने के लिए अपने राज्य के जलाशयों से कृष्णा नदी का पानी छोड़ने का आग्रह किया. तेलंगाना के एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, शिष्टमंडल ने मंगलवार शाम को बेंगलुरु में शिवकुमार से मुलाकात की. किसानों को कृष्णा नदी से पानी छोड़े जाने का इंतजार है क्योंकि यह पानी नहरों के जरिए उनकी फसलों की सिंचाई को पूरा करेगा.
तेलंगाना में बारिश की कमी का असर धान के साथ दूसरी पानी की ज्यादा जरूरत वाली फसलों पर भी पड़ा है. इस सीजन में अरंडी और गन्ने की खेती में 25 से 48 फीसदी तक गिरावट की बात कही जा रही है. वहीं, ज्वार, मक्का, अरहर और सोयाबीन जैसी कम पानी में होने वाली बारिश आधारित फसलों का उत्पादन सामान्य रहने की उम्मीद है. ये फसलें अब पकने के चरण में हैं और इन्हें पानी बेहद जरूरी है. अगर समय पर सिंचाई नहीं की गई तो दाना सिकुड़ कर खराब हो सकता है और किसानों को भारी नुकसान की आशंका है.