एग्रीवेट: गन्ने की खेती में उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय को बेहतर करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार नई रणनीति पर काम कर रही है. सरकार का फोकस अधिक उत्पादन वाली और रोग प्रतिरोधी किस्मों के साथ बेहतर बीज, वैज्ञानिक खेती और कृषि मशीनों को बढ़ावा देने पर है. इसके जरिए खेती की उत्पादकता बढ़ाने और किसानों को आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने की तैयारी है.
उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती का रकबा बढ़ाने के बजाय अब उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. गन्ना आयुक्त और राज्य चीनी निगम लिमिटेड की प्रबंध निदेशक मिनिस्थी एस. ने द हिंदू को कहा कि जमीन की उपलब्धता सीमित होने के कारण भविष्य में गन्ने की पैदावार बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान देना होगा. उन्होंने कहा कि राज्य में अधिक उत्पादन देने वाली और रोग प्रतिरोधी गन्ने की किस्मों, बेहतर बीज व्यवस्था, वैज्ञानिक खेती और कृषि मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है.
मिनिस्थी ने कहा कि गन्ने की किस्मों को बदलना भी एक बड़ी चुनौती है. Co-0238 किस्म ने उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती को काफी बदल दिया था, लेकिन अब इसमें लाल सड़न रोग (रेड रॉट) का खतरा बढ़ा है. इसलिए नई और अधिक उत्पादन के साथ ज्यादा चीनी देने वाली किस्में विकसित करने पर काम किया जा रहा है. साथ ही किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाला बीज उपलब्ध कराने की कोशिश भी जारी है.
वहीं, 2014 बैच के आईएएस अधिकारी और अपर गन्ना आयुक्त अभिषेक आनंद ने बताया कि गन्ने के क्षेत्र में रिमोट सेंसिंग, सैटेलाइट इमेजरी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है. इससे फसलों की निगरानी और गन्ने की अलग-अलग किस्मों की पहचान ज्यादा सटीक तरीके से की जा सकेगी. उन्होंने कहा कि मोबाइल ऐप के जरिए जियो-टैग की गई खेतों की जांच से निगरानी व्यवस्था बेहतर हो रही है. बीज की ट्रेसिंग और फसल से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण की नई व्यवस्थाओं पर भी काम किया जा रहा है
गन्ना विभाग ने रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (RSAC) के साथ मिलकर एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है. इसके तहत रिमोट सेंसिंग और मशीन लर्निंग की मदद से गन्ने के रकबे का अनुमान लगाने और खेतों में बोई गई किस्मों की पहचान करने का काम किया जाएगा. उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के लिए व्यवस्था को डिजिटल बनाया जा रहा है. अपर गन्ना आयुक्त अभिषेक आनंद ने बताया कि अब किसान मोबाइल फोन से सर्वे की जानकारी, गन्ना आरक्षण, तौल का रिकॉर्ड और भुगतान की स्थिति देख सकते हैं.
उन्होंने कहा कि पहले गन्ने से जुड़ी ज्यादातर जानकारी कागजों में दर्ज होती थी, लेकिन अब यह व्यवस्था धीरे-धीरे रियल टाइम डिजिटल सिस्टम में बदल रही है. इससे किसानों को जानकारी आसानी से मिल रही है और व्यवस्था में पारदर्शिता भी बढ़ी है. अभिषेक आनंद के मुताबिक, डिजिटल सिस्टम से विवाद कम करने और जिम्मेदारी तय करने में भी मदद मिली है. उन्होंने कहा कि मौसम में बदलाव और संसाधनों की कमी के दौर में खेतों से जुड़ा सटीक डेटा जुटाना और उसका इस्तेमाल करना खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है.