एग्रीवेट: हरियाणा के करनाल और कैथल क्षेत्र के कई राइस मिलर्स ने खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 में धान खरीद में शामिल होने पर सहमति जताई है. इसके साथ ही कई दिनों से चल रहा गतिरोध अब खत्म हो गया है. दरअसल, कुछ राइस मिलर्स ने शुरुआती धान खरीद और केंद्र व राज्य सरकार से जुड़े लंबित मुद्दों को लेकर इस सीजन के लिए रजिस्ट्रेशन कराने से इनकार कर दिया था. लेकिन मिलर्स ने सरकार के साथ बातचीत के बाद सीजन में हिस्सा लेने पर सहमति जताई. इसके साथ ही धान खरीद को लेकर बनी स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है.
करनाल और कैथल के राइस मिलर्स अब धान खरीद प्रक्रिया में शामिल होंगे. मिलर्स सरकारी नियमों के अनुसार अपना रजिस्ट्रेशन कराएंगे और किसानों को धान खरीद के दौरान जरूरी सहयोग देंगे. करनाल राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सौरभ गुप्ता ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि गुरुवार को मिलर्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने करनाल के डिप्टी कमिश्नर आनंद कुमार शर्मा से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं. इसके बाद उन्हें चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ बैठक की जानकारी दी गई.
गुप्ता के मुताबिक, मिलर्स ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की. मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि मिलर्स के साथ कोई अन्याय नहीं होगा और सभी से रजिस्ट्रेशन पूरा करने की अपील की. उन्होंने बताया कि करनाल जिले के राइस मिलर्स की बैठक शनिवार को निसिंग में होगी. इस बैठक में मिलर्स को आगे की प्रक्रिया और अन्य जानकारी दी जाएगी. सौरभ गुप्ता ने विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण और विधायक जगमोहन आनंद व योगेंद्र राणा का भी सहयोग के लिए आभार जताया.
मिलर्स ने मांग की है कि धान की खरीद की जिम्मेदारी सरकारी एजेंसियों की हो. उन्होंने संबंधित विभागों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि मिलों तक धान केवल अधिकृत ट्रांसपोर्टरों के जरिए ही पहुंचे. इससे मिलर्स की सीधे तौर पर दखल कम होगी और भ्रष्टाचार की आशंका भी नहीं रहेगी. राइस मिलर्स के मुताबिक, इस व्यवस्था से धान खरीद प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी होगी. उनका कहना है कि खरीद और परिवहन में सरकारी एजेंसियों की स्पष्ट भूमिका होने से किसानों को भी परेशानी नहीं होगी.
राइस मिलर्स सरकार और केंद्रीय खाद्य पूल के बीच अहम कड़ी का काम करते हैं. वे मिलिंग के बाद कस्टम मिल्ड राइस (CMR) केंद्रीय पूल में भेजते हैं. ऐसे में मिलर्स के सीजन में शामिल होने से राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली है. इससे पहले मिलर्स ने अपनी लंबित मांगों को लेकर इस सीजन में CMR का काम नहीं करने का ऐलान किया था. उनका कहना था कि पिछले सीजन का करीब 6 लाख मीट्रिक टन CMR अब भी मिलों में पड़ा है. भारतीय खाद्य निगम (FCI) की ओर से चावल स्वीकार नहीं किए जाने के कारण यह स्टॉक लंबित है.
केंद्र सरकार ने राइस मिलर्स को राहत देते हुए CMR जमा करने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 कर दी है. पहले यह समयसीमा 30 जून 2026 तक थी. पिछले साल के बोनस और भुगतान से जुड़े मुद्दों के कारण राइस मिलर्स फैसले का इंतजार कर रहे थे. इन मुद्दों पर बातचीत शुक्रवार को पूरी हुई, जिसके बाद मिलर्स के सीजन में शामिल होने का रास्ता साफ हुआ.
वहीं, हरियाणा में धान की आवक शुरू हो गई है और राज्य सरकार ने खरीद की तैयारियां तेज कर दी हैं. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि केंद्र सरकार से अनुमति मिलते ही राज्य में धान की सरकारी खरीद शुरू कर दी जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि किसानों को अपनी फसल बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो. किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं. सरकारी खरीद शुरू करने से पहले फसल के सत्यापन की प्रक्रिया भी चल रही है.