एग्रीवेट: उत्तर प्रदेश लखीमपुर खीरी में बन रहे भारत के पहले बायोपॉलीमर प्लांट को अक्टूबर में शुरू किया जाएगा. योगी सरकार ने बलरामपुर चीनी को बायोप्लास्टिक शोध एवं विकास संयंत्र के लिए केंद्र से 75 करोड़ रुपये का अनुदान जारी कर दिया है. इसके साथ ही अब गन्ना से चीनी-गुड़ और इथेनॉल बनाने के बाद बायोप्लास्टिक बनाने का रास्ता साफ हो गया है. इस बायोप्लास्टिक का इस्तेमाल पारंपरिक प्लास्टिक के विकल्प के रूप में किया जाएगा और इससे कप-प्लेट, पॉलीथीन, बैग, कृषि योग्य प्लास्टिक शीट बनाई जा सकेंगी.
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में 3,080 करोड़ रुपये के निवेश से बन रहे भारत के पहले बायोपॉलीमर संयंत्र (जैव बहुलक संयंत्र) के अक्टूबर में चालू होने जा रहा है. बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड को उत्तर प्रदेश में बायोप्लास्टिक पॉली लैक्टिक एसिड (PLA) और को-पॉलिमर उत्पादों के लिए एक प्रायोगिक शोध सुविधा स्थापित करने के लिए केंद्र से 75 करोड़ रुपये का अनुदान जारी कर दिया गया है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 22 फरवरी 2025 को गोला गोकर्णनाथ में बलरामपुर चीनी मिल्स की कुंभी चीनी इकाई में इस परियोजना की आधारशिला रखी थी. इस दौरान सीएम ने कहा था कि यह परियोजना पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा देगी और इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे. बता दें कि अब तक गन्ना से चीनी, गुड़, शीरा, खोई, इथेनॉल बनाया जाता रहा है, लेकिन अब बायोप्लास्टिक भी बनेगी, जिसका इस्तेमाल प्लास्टिक के विकल्प के रूप में उत्पादन बनाने में किया जा सकेगा.
लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारी (डीएम) अंजनी कुमार सिंह ने निर्माणाधीन संयंत्र का निरीक्षण किया और अक्टूबर में इसकी प्रस्तावित शुरुआत से पहले उसकी प्रगति की समीक्षा की. डीएम ने कहा कि स्थानीय स्तर पर उगाए गए गन्ने से लेकर पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) आधारित बायोप्लास्टिक बनाने तक की पूरी निर्माण प्रक्रिया एक ही परिसर में होगी. उन्होंने कह कि यह अग्रणी परियोजना खीरी के कृषि-आधारित औद्योगिक विकास में एक नया अध्याय जोड़ेगी और क्षेत्र में सतत और पर्यावरण के अनुकूल औद्योगिक विकास को एक नई दिशा देगी.
डीएम ने गन्ने को चीनी और फिर पीएलए बायोप्लास्टिक में बदलने की प्रक्रिया की जांच की और तकनीकी पहलुओं तथा उत्पादन कार्य के बारे में जानकारी मांगी. अधिकारियों ने बताया कि इस सुविधा की एक बड़ी खासियत इसका जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) सिस्टम है, जिसे यह सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया है कि कोई भी हानिकारक तरल कचरा नदियों या नालियों में न बहाया जाए.