पंजाब में धान कटाई से पहले बढ़ी चुनौती, 67 हजार पराली प्रबंधन मशीनें हुईं बेकार – एग्रीवेट

Team Agrivate
6 Min Read

एग्रीवेट: पंजाब में इस साल धान का रकबा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. इससे धान कटाई के बाद निकलने वाली पराली के प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ गई है. दूसरी ओर, पराली जलाने पर रोक के लिए शुरुआती वर्षों में खरीदी गई बड़ी संख्या में क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट (CRM) मशीनें अब काम नहीं कर रही हैं. ऐसे में राज्य के सामने पराली प्रबंधन के लिए मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने की नई चुनौती है. कृषि विभाग के मुताबिक, इस सीजन में करीब 1.25 लाख CRM मशीनें काम करने की स्थिति में रहने की उम्मीद है. वहीं, 2018 में योजना शुरू होने के बाद से बांटी गई करीब 67 हजार मशीनें लगभग पांच साल पूरा कर चुकी हैं. अब इन्हें खराब या कबाड़ माना जा रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि विभाग ने साफ किया है कि ये 67 हजार पुरानी मशीनें इस सीजन के लिए अनुमानित 1.25 लाख चालू मशीनों में शामिल नहीं हैं. यानी इस साल पराली प्रबंधन के लिए उपलब्ध मशीनों की संख्या 1.25 लाख रहने का अनुमान है, जबकि करीब 67 हजार पुरानी मशीनें अपनी उपयोगी अवधि पूरी कर चुकी हैं. पुरानी मशीनों की जगह पंजाब में इस साल करीब 22 हजार नई क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट (CRM) मशीनें जोड़ी जा रही हैं. इन मशीनों की खरीद पर करीब 600 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इस रकम में केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 60:40 के अनुपात में होगी.

इसके अलावा, दूसरी योजनाओं और अनुदान के जरिए करीब 2 हजार और मशीनें मिलने की उम्मीद है. इससे धान कटाई  के दौरान किसानों को पराली प्रबंधन के लिए अतिरिक्त मशीनें उपलब्ध हो सकेंगी. CRM योजना को 2023-24 से राष्ट्रीय कृषि मशीनीकरण ढांचे में शामिल कर लिया गया है. इसके तहत भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60:40 के अनुपात में फंडिंग की व्यवस्था है.

पंजाब ने 2018 से अब तक करीब 1.65 लाख क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट (CRM) मशीनें बांटी हैं. इनमें से करीब 67 हजार मशीनें लगभग पांच साल की उपयोगी अवधि पूरी कर चुकी हैं. ऐसे में पिछले वर्षों की करीब 98 हजार मशीनें अभी काम करने की स्थिति में हैं. कृषि निदेशक गुरजीत सिंह बराड़ के मुताबिक, नई मशीनों और दूसरी योजनाओं के तहत मिलने वाली मशीनों को जोड़ने के बाद इस सीजन में करीब 1.25 लाख CRM मशीनें काम करने की स्थिति में रहने की उम्मीद है.

पंजाब में इस साल धान का रकबा अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है. बासमती और गैर-बासमती समेत धान की खेती 32.86 लाख हेक्टेयर में हुई है. यह राज्य के कुल खरीफ रकबे का 92 फीसदी से ज्यादा है. इस सीजन में चालू CRM मशीनों में 70 हजार से ज्यादा सुपर सीडर होने का अनुमान है. पराली प्रबंधन के लिए पंजाब में सुपर सीडर की मांग लगातार बढ़ी है. योजना के शुरुआती वर्षों में हैप्पी सीडर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली मशीन थी, लेकिन अब सुपर सीडर ने उसकी जगह ले ली है.

पंजाब में हर साल 2 करोड़ टन से ज्यादा धान की पराली निकलती है. इस साल सरकार करीब 80 लाख टन पराली का एक्स-सिटू इस्तेमाल करने की उम्मीद कर रही है. इसमें बेलर मशीनों की मदद से पराली की गांठें बनाना भी शामिल है. पिछले तीन-चार साल में राज्य में बेलर की मांग काफी बढ़ी है. इन पराली की गांठों का इस्तेमाल बायोमास प्लांट, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट और पेलेट बनाने वाली इकाइयों में किया जाता है. पंजाब और आसपास के इलाकों में ऐसी कई नई इकाइयां भी स्थापित हो रही हैं.

Share This Article
1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *