एग्रीवेट: पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन को लेकर भारत में चल रहे प्रयासों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कई अहम बातें रखीं. नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, गोबरधन योजना, सौर ऊर्जा और स्वच्छ परिवहन जैसे मुद्दों पर भारत की प्रगति का जिक्र किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी काम कर रहा है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित देशों का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन भारत की तुलना में छह गुना तक अधिक है. उन्होंने कहा कि भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन अभी भी वैश्विक औसत के आधे से कम है. प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी को लेकर विकासशील देशों पर लगाए जाने वाले आरोपों का भी जिक्र किया और कहा कि भारत इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार रखता रहा है.
खेती और पर्यावरण के संबंध को लेकर प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन का उल्लेख किया. उनके मुताबिक, देश में करीब 12.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 24,000 प्राकृतिक खेती क्लस्टर तैयार किए गए हैं. इसके अलावा बदलते मौसम के हिसाब से करीब 3,000 जलवायु-अनुकूल फसल किस्में विकसित की गई हैं. प्रधानमंत्री ने कृषि-वानिकी यानी खेतों के साथ पेड़ लगाने को भी बढ़ावा देने की बात कही. इससे खेती के साथ पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलने की बात कही गई. उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 12 वर्षों में देश के बहुत घने जंगलों का क्षेत्र 22 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा है.
जल संरक्षण के प्रयासों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि देश में 70,000 से ज्यादा अमृत सरोवर बनाए जा चुके हैं. वहीं, ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत करीब 1.5 करोड़ वर्षा जल संचयन संरचनाएं तैयार की गई हैं. प्रधानमंत्री के मुताबिक, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ जैसे प्रयासों से 2 करोड़ से ज्यादा किसान आधुनिक सिंचाई सुविधाओं से जुड़े हैं. गांवों के कचरा प्रबंधन को लेकर गोबरधन योजना का उदाहरण दिया गया. इसके तहत गोबर और दूसरे जैविक कचरे को उपयोगी संसाधनों में बदलने पर काम किया जा रहा है. प्रधानमंत्री ने कहा कि कचरे को समस्या मानने के बजाय उसे संसाधन में बदलने की दिशा में काम होना चाहिए. उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक और ‘रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकल’ के जरिए सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की बात भी कही.
भारत दिखा रहा है कि कैसे विकास और पर्यावरणीय स्थिरता साथ-साथ चल सकती है। “पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य” विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए।
– नरेंद्र मोदी (@narendermodi) 19 सितंबर, 2026
प्रधानमंत्री ने बताया कि करीब 12 साल पहले देश की सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 2 गीगावॉट थी, जो अब बढ़कर 160 गीगावॉट से ज्यादा हो गई है. पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 50 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर लगाए गए हैं और पात्र परिवारों को करीब 80,000 रुपये तक की सहायता दी जा रही है. पीएम-कुसुम योजना के तहत 30 लाख किसानों को सोलर पंप मिलने की जानकारी भी दी गई. स्वच्छ परिवहन पर प्रधानमंत्री ने बताया कि देश में हाल ही में पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू हुई है, जिसे उन्होंने दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन बताया. इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री भी 2014 से पहले के 3,000 से कम वार्षिक स्तर से बढ़कर पिछले साल करीब 25 लाख तक पहुंचने की बात कही गई. इसके अलावा देश में मेट्रो नेटवर्क और जलमार्गों के विस्तार का भी उल्लेख किया गया.
प्रधानमंत्री ने कहा कि G20 देशों में भारत ऐसा देश है जिसने पेरिस समझौते के तहत COP-21 में किए गए लक्ष्यों को तय समय से पहले हासिल किया है. उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में पवन ऊर्जा क्षमता तीन गुना बढ़ी है, जबकि जल विद्युत क्षमता में भी विस्तार हुआ है. भारत की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता में भी बड़ी वृद्धि होने की बात उन्होंने कही. प्रधानमंत्री के मुताबिक, पर्यावरण से जुड़े ये आंकड़े केवल विकास की तस्वीर नहीं दिखाते, बल्कि जलवायु और आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत के प्रयासों को भी दर्शाते हैं. सम्मेलन में पर्यावरण, जलवायु और बेहतर पर्यावरणीय व्यवस्था को लेकर विशेषज्ञों और न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी भाग लिया.