एग्रीवेट: भारतीय रसोई में आलू की एक अपनी अलग जगह है और सब्जी का इस्तेमाल सुबह के पराठे से लेकर सब्जी बनाने के लिए हर घर में बड़े पैमाने पर लोग इससे बने व्यंजन खाना पसंद करते हैं. इसी बीच बाजारों में एक खास किस्म के आलू की बिक्री हो रही है, जो बैंगनी रंग और पोषक तत्वों की वजह से लोगों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गया है. ऐसे में किसान अगर इस किस्म की पैदावार करते हैं, तो तगड़ी उपज के साथ अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. आगे इस लेख में जानें इस नई किस्म के बारे में पूरी जानकारी.
सर्दियों का मौसम आ गया है और इस दौरान बाजारों में बैंगनी रंग क आलू बाजारों में तेजी से बिक रहा है और लोगों के बीच एक चर्चा का विषय बन गया है. आपको बता दे कि आलू की इस किस्म को कुफरी जमुनिया (Kufri Jamunia) किस्म के नाम से जाना जाता है, जिसकों विकसित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI) द्वारा किया गया है, जो आलू की एक बायोफोर्टिफाइड (जैव-पोषक) और रंगीन किस्म है.
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किन क्षेत्रों के किसान इस किस्म की पैदावार कर सकते हैं?
अगर आप अपने खेतों में आलू की पैदावार भारी मात्रा में करते हैं और अच्छी पैदावार प्राप्त नहीं कर पाते हैं, तो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI) द्वारा विकसित कुफरी जमुनिया किस्म आलू की किस्म आपके लिए फायदे का सौंदा साबित हो सकती है, क्योंकि इस आलू की किस्म में कई पोषक तत्व पाएं जाते हैं. ऐसे में इन इलाकों के उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान के किसान इस किस्म की पैदावार कर अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं और अच्छी आमदनी अर्जित कर सकते हैं.
कुफरी जमुनिया से कितनी मिलेगी पैदावार?
किसानों को ऐसी फसल की तलाश होती है, जिससे कम समय में अच्छी गुणवत्ता वाली अच्छी उपज प्राप्त हो सकें. ऐसे में आलू की कुफरी जमुनिया किस्म किसानों के बीच काफी तेजी से अपने रंग और पैदावार की वजह से लोकप्रिय हो रही है. आपको बता दे कि अगर आप इस आलू की किस्म की पैदावार करते हैं, तो आप इस किस्म से लगभग 90 से 100 दिनों में औसत पैदावार 32 से 35 टन प्रति हेक्टेयर प्राप्त कर सकते हैं.