एग्रीवेट: त्योहारों से पहले ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में तेजी आ गई है. तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के थोक बाजार में आयात किए जाने वाले बादाम, पिस्ता और अखरोट समेत कई सूखे मेवों के दाम 25 से 35 फीसदी तक बढ़ गए हैं. कारोबारियों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, माल ढुलाई का खर्च बढ़ने और रुपये में कमजोरी के कारण कीमतों में उछाल आया है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कारोबारियों का कहना है कि सऊदी अरब पर हमलों के बाद जहाजों के रास्ते बदले गए हैं. इससे ड्राई फ्रूट्स की खेप पहुंचने में ज्यादा समय लग रहा है और परिवहन का खर्च भी बढ़ गया है. आयातकों ने बढ़ी हुई लागत का बोझ थोक कारोबारियों और ग्राहकों पर डाल दिया है. वहीं, त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन के कारण ड्राई फ्रूट्स की मांग भी बढ़ रही है. ऐसे में ग्राहकों को अब बादाम, पिस्ता और अखरोट खरीदने के लिए पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है
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ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में बढ़ोतरी का असर बादाम, पिस्ता, अखरोट और चिलगोजे पर साफ दिखाई दे रहा है. अमेरिकी बादाम के दाम 880 रुपये से बढ़कर 1,230 रुपये प्रति किलो हो गए हैं. वहीं, पिस्ता 1,500 रुपये से बढ़कर 2,000 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. अखरोट की कीमत 1,600 रुपये से बढ़कर 2,100 रुपये और चिलगोजे की कीमत 4,200 रुपये से बढ़कर 5,500 रुपये प्रति किलो हो गई है. प्रीमियम किस्म के ड्राई फ्रूट्स के दाम 3,000 से 9,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं.
बेगम बाजार के ड्राई फ्रूट्स कारोबार से जुड़े व्यापारी प्रकाश जैन ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि पिछले साल के मुकाबले पिस्ता 60 से 70 फीसदी तक महंगा हो चुका है. वहीं, किस्म के हिसाब से बादाम की कीमतों में 20 से 40 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने बताया कि बादाम, पिस्ता, किशमिश और अखरोट समेत लगभग सभी सूखे मेवे इस समय रिकॉर्ड कीमतों पर बिक रहे हैं. भारत ईरान, अफगानिस्तान और अमेरिका से ड्राई फ्रूट्स आयात करता है.
कारोबारियों के मुताबिक, ईरान और अफगानिस्तान से आने वाले ड्राई फ्रूट्स की खेप आमतौर पर सऊदी अरब के रास्ते पहुंचती थी. लेकिन पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण जहाजों के रास्ते बदले जा रहे हैं. इससे माल ढुलाई और बीमा का खर्च बढ़ गया है. इसके अलावा, रुपये में कमजोरी से आयात की लागत भी बढ़ गई है. इसका कारोबारी हितेन शाह के मुताबिक, अगर पश्चिम एशिया में सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें जारी रहती हैं, तो दिसंबर से पहले ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद कम है. महंगे ड्राई फ्रूट्स का असर कारोबार पर भी पड़ रहा है. व्यापारियों का कहना है कि बिक्री में 30 से 40 फीसदी तक गिरावट आई है. एक रिटेल कारोबारी ने बताया कि त्योहारों का सीजन होने के बावजूद दुकान पर आने वाले ग्राहकों की संख्या काफी कम हो गई है. इससे मुनाफा कमाने की गुंजाइश भी घट गई है.
ड्राई फ्रूट्स महंगे होने का असर मिठाइयों की कीमतों पर भी पड़ा है. बाजार में मिठाइयां 20 से 25 फीसदी तक महंगी हो गई हैं. गुलाब जामुन और कलाकंद के दाम 950 से 1,200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं. वहीं, रसगुल्ला, सोन पापड़ी, रसमलाई, बालूशाही और मोतीचूर के लड्डू 800 से 1,100 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं. चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी से मिठाइयां बनाना भी महंगा हो गया है. जुलाई और अगस्त में चीनी करीब 45 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, लेकिन अब इसकी कीमत बढ़कर 60 से 70 रुपये प्रति किलो हो गई है. इससे मिठाइयों की लागत बढ़ गई है.
रसूलपुरा स्थित एक मिठाई की दुकान के मैनेजर ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में कच्चे माल और उत्पादन का खर्च काफी बढ़ गया है. ऐसे में कारोबारियों के पास बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. ड्राई फ्रूट्स से बनने वाली मिठाइयां और भी महंगी हो गई हैं. काजू कतली, अंजीर के लड्डू और ड्राई फ्रूट्स के हलवे की कीमत 1,800 से 1,900 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. ऐसे में इस त्योहारों के सीजन में ग्राहकों को कम मात्रा में मिठाइयां खरीदनी पड़ सकती हैं या फिर सस्ते विकल्पों का सहारा लेना पड़ सकता है.