एग्रीवेट: महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हरियाणा समेत कई राज्यों में किसान गन्ना मूल्य को लेकर गुस्से में हैं. महाराष्ट्र में सोमवार को स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के नेतृत्व में किसानों ने कई जिलों में सड़क पर उतरकर जमकर हंगामा और कड़ा विरोध प्रदर्शन किया . कर्नाटक के बेलगावी में सैकड़ों की संख्या में किसान बाइक रैली निकाली और राज्य की ओर से घोषित गन्ना मूल्य को अनुचित बताकर नारेबाजी की. वहीं, हरियाणा में किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ और भाकियू चढ़ूनी के प्रमुख गुरनाम सिंह ने आंदोलन करने की चेतावनी दी है. जबकि, भाकियू ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ में गन्ना किसानों की महापंचायत बुलाई है.
महाराष्ट्र के नंदुरबार में गन्ना किसानों की उचित मूल्य की मांग को लेकर स्वाभिमानी शेतकरी संगठन का आंदोलन लगातार पांचवें दिन भी जारी है. संगठन ने 500 से 600 गन्ने से लदे ट्रैक्टरों को रोककर विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है. चीनी मिलों ने गन्ने का भाव 3100 से 3200 रुपये प्रति टन घोषित किया है, जबकि खांडसारी इकाइयों ने 3300 रुपये प्रति टन की दर तय की है.
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स्वाभिमानी शेतकरी संगठन की ओर से कहा गया है कि चीनी का भाव 65 रुपये होने के बावजूद कम भुगतान पर सवाल उठा रहे हैं और 70:30 फॉर्मूले के तहत उचित मूल्य की मांग कर रहे हैं. संगठन के प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम चौधरी ने मुख्यमंत्री पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए तत्काल बैठक बुलाने की मांग की है. उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र होगा.
Watch | नंदुरबार, महाराष्ट्र के नंदुरबार में गन्ना किसानों की उचित मूल्य की मांग को लेकर स्वाभिमानी शेतकरी संगठन का आंदोलन लगातार पांचवें दिन भी जारी है। संगठन ने 500 से 600 गन्ने से लदे ट्रैक्टरों को रोककर विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। चीनी मिलों ने गन्ने का भाव 3,100 से 3,200 रुपये प्रति टन घोषित किया है, जबकि खांडसारी इकाइयों ने 3,300 रुपये प्रति टन की दर तय की है।
किसान चीनी का भाव 65 रुपये होने के बावजूद कम भुगतान पर सवाल उठा रहे हैं और 70:30 फॉर्मूले के तहत उचित मूल्य की मांग कर रहे हैं। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम चौधरी ने मुख्यमंत्री पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए तत्काल बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र होगा।
कर्नाटक के बेलगावी में हजारों गन्ना किसानों ने अपनी फसल के लिए 5500 रुपये प्रति टन कीमत की मांग करते हुए जेल भरो प्रोटेस्ट किया. उन्होंने राज्य सरकार के MSP और SAP रेट के ऐलान पर अपना गुस्सा जाहिर किया. इसके अलावा मांड्या, धारवाड़ जिलों में गन्ना किसान अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि की मांग को लेकर सड़क पर उतरकर जमकर हंगामा और कड़ा विरोध प्रदर्शन किया . सीएम डीके शिवकुमार ने केंद्र से बातचीत कर हल निकालने का भरोसा दिया है.
चीनी के दाम बढ़ने के बावजूद हरियाणा में गन्ने का रेट मामूली बढ़ाए जाने से नाराज भाकियू चढ़ूनी के प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी ने किसानों से आंदोलन तेज करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि नायब सैनी सरकार ने 15 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया है, जो किसानों के साथ मजाक है. उन्होंने जिला प्रधानों से भी धरना शुरू करने की अपील की, जहां अभी तक प्रदर्शन शुरू नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि गन्ने का रेट इस बार किसानों का बड़ा मुद्दा है और इसके लिए सभी को एकजुट होकर लड़ाई लड़नी होगी.
उत्तराखंड की इकबालपुर शुगर मिल में साल 2017 में गन्ना डालने वाले हरियाणा के जिन किसानों को अब तक भुगतान नहीं मिला है. किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि किसान भवन पानीपत की कमेटी और अन्य किसान संगठनों के प्रयासों के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई शुरू हुई है. हरियाणा सरकार के कृषि विभाग के अधिकारियों ने बकाया भुगतान का रिकॉर्ड मांगा है, ताकि उत्तराखंड सरकार और मिल प्रबंधन से किसानों की बकाया राशि को लेकर आगे बात की जा सके. उन्होंने कहा कि किसानों को गन्ना मूल्य और बकाया भुगतान पर सरकार जल्द फैसला ले.
उत्तर प्रदेश के बरेली में गन्ने का मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग को लेकर किसान एकता संघ ने सोमवार को पैदल मार्च निकाला और नारेबाजी की. संगठन ने किसानों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा. संगठन ने फार्मर रजिस्ट्री और सैटेलाइट सर्वे की अनिवार्यता खत्म कर धान खरीद की पुरानी सरल व्यवस्था लागू करने की मांग की. साथ ही गन्ने का मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल तत्काल घोषित करने की माग की है.
गन्ना मूल्य में बढ़ोत्तरी को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने लखनऊ में मंगलवार को महापंचायत बुलाई है. उत्तर प्रदेश के किसानों से किसान यूनियन ने अपील करते हुए एकजुट होने का आह्वान किया है. भाकियू मंडल अध्यक्ष हरिनाम सिंह के नेतृत्व में लखनऊ के समता मूलक चौराहे पर दोपहर 1 बजे महापंचायत करने का ऐलान किया गया है. इस दौरान गन्ने का लाभकारी मूल्य देने की मांग, फसल नुकसान का मुआवजा-बीमा भुगतान, धान, तिलहन और दलहन किसानों की समस्याओं और बैंकों के साथ ही और पुलिस उत्पीड़न के मुद्दे पर पंचायत में आगे कार्रवाई के लिए फैसला लिया जाएगा.