एग्रीवेट: भारत में जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान सोने की मांग सालाना आधार पर 20 फीसदी घटकर 162.5 टन रह गई है. इसकी वजह आयात शुल्क में बढ़ोतरी, कीमतों में तेज उछाल और प्रधानमंत्री मोदी की ओर से खरीदारी पर अंकुश लगाने की अपील को बताया गया है. विश्व स्वर्ण परिषद (WGC) ने मंगलवार को यह जानकारी दी और पूरे साल के लिए मांग 625-675 टन रहने का अनुमान लगाया है. वहीं, बीते कुछ सप्ताह से सोना और चांदी की कीमतों में जारी गिरावट ने छोटे ग्रामीण और कस्बाई निवेशकों के लिए खरीद में बचत का सुनहरा मौका दिया है. कमोडिटी एंड इनवेस्टमेंट एक्सपर्ट एके निगम ने बताया कि गांव और कस्बों के लोगों को धनतेरस से पहले आगामी शादी सीजन की ज्वैलरी खरीद के लिए यह अच्छा अवसर है.
विश्व स्वर्ण परिषद (WGC) की मंगलवार को जारी ‘तीसरी तिमाही 2026 में सोने की मांग के रुझान’ रिपोर्ट के अनुसार 2025 की इसी तिमाही में सोने की मांग 229.8 टन रही थी. हालांकि, सोने की मांग का मूल्य तीन फीसदी बढ़कर 2,41,900 करोड़ रुपये हो गया जो पिछले साल की इसी तिमाही में 2,35,090 करोड़ रुपये था. तिमाही के दौरान सोने का औसत भाव 4,262 अमेरिकी डॉलर प्रति ट्रॉय औंस (1,48,891 रुपये प्रति 10 ग्राम) रहा. 2025 की इसी अवधि में यह 3,457 अमेरिकी डॉलर (1,02,287 रुपये) था. इन कीमतों में आयात शुल्क और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) शामिल नहीं हैं.
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भारत में कुल आभूषण मांग 2025 की इसी तिमाही के 125 टन के मुकाबले 20 फीसदी घटकर 99.9 टन रह गई. हालांकि, मूल्य के लिहाज से यह 16 फीसदी बढ़कर 1,48,700 करोड़ रुपये हो गई. काउंसिल ने बयान में कहा कि इसका असर खास तौर पर आभूषण सेक्शन में दिखा, जहां मांग सालाना आधार पर 20 फीसदी घटी, जबकि इसका मूल्य 16 फीसदी बढ़ा. अनुमान है कि पूरे साल सोने की मांग 625 से 675 टन के बीच रहेगी.
तीसरी तिमाही के अंत में सोने की कीमतों में आई गिरावट से आभूषणों की मांग को समर्थन मिला और इससे कुछ टली हुई खरीदारी को बढ़ावा मिला है. शादी सीजन और त्योहारों के लिए खरीदारी से भी मांग को समर्थन मिला, खासकर दक्षिण भारत में जहां अगस्त में प्रमुख त्योहार आए. ऊंची कीमतों के बीच उपभोक्ता अब सोच-समझकर खरीदारी करने और पुराने सोने के बदले नए आभूषण लेने की योजनाओं को तेजी से अपना रहे हैं. सोने के आभूषणों के प्रति उनकी पसंद बरकरार है.
बीपीएन फिनकैप के सीईओ एके निगम ने बताया कि अक्टूबर में सोना चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है. इस गिरावट की बड़ी वजहों में अमेरिका में ब्याज दरें ज्यादा रहने की आशंका है. इसके चलते कीमतें नीचे बनी हुई हैं. वहीं, वैश्विक तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने गोल्ड के दाम लुढ़के हुए हैं. वहीं, बीते कुछ सप्ताह में प्रॉफिट बुकिंग और मार्जिन ट्रेडिंग में फंड हाउसेस को अपना घाटा कवर करने के लिए सोना-चांदी बेचनी पड़ी है. उन्होंने कहा कि धनतेरस और दीवाली से पहले निवेशक इस गिरावट का लाभ ले सकते हैं. लेकिन, एक ही जगह निवेश करने से बचने की सलाह दी है.
एके निगम ने कहा कि सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट का फायदा छोटे निवेशक उठा सकते हैं. उन्होंने कहा कि गांव और कस्बों में रहने वाले लोग शादी सीजन के लिए अभी गोल्ड और सिल्वर की खरीदारी करके काफी बचत कर सकते हैं. भविष्य की स्थिति पर एक्सपर्ट ने कहा कि आगामी त्योहारों और शादी के मौसम से सोने की मांग को समर्थन मिलने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि इस दौरान उपभोक्ता हल्के वजन के आभूषणों और पुराने सोने के बदले खरीदारी के जरिये लाभ उठा सकते हैं.