एग्रीवेट: महाराष्ट्र के कई इलाकों में सूखे के हालात के बीच किसानों से कर्ज की जबरन वसूली किए जाने का मामला सामने आया है. नांदेड़ जिले के लोहा में सोमवार को एक किसान संगठन के कार्यकर्ताओं ने दो निजी फाइनेंस कंपनियों के कार्यालयों में तोड़फोड़ की. संगठन का आरोप है कि कंपनियों के रिकवरी एजेंट किसानों पर कर्ज चुकाने के लिए दबाव बना रहे हैं और उन्हें परेशान कर रहे हैं.
क्रांतिकारी शेतकरी संगठन के कार्यकर्ताओं ने लोहा स्थित श्रीराम फाइनेंस और बजाज फाइनेंस के कार्यालयों को निशाना बनाया. संगठन के जिला इकाई प्रमुख बालासाहेब जाधव ने कहा कि किसानों की ओर से रिकवरी एजेंटों द्वारा परेशान किए जाने की कई शिकायतें मिली थीं. इसके बाद संगठन के अधिकारी दोनों फाइनेंस कंपनियों के कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां मिले जवाब से वे संतुष्ट नहीं हुए.
राजस्थान में 22 हजार लीटर ‘मिलावटी’ और एक्सपायर्ड घी जब्त, तीन आरोपी गिरफ्तार – एग्रीवेट
बालासाहेब जाधव ने बताया कि बातचीत से समाधान नहीं निकलने पर कुछ कार्यकर्ताओं ने लकड़ी के डंडों से कार्यालयों में तोड़फोड़ की. इस दौरान दरवाजों, टेबल, कंप्यूटर और अन्य फर्नीचर को नुकसान पहुंचाया गया. घटना के समय कार्यालयों में मौजूद कर्मचारी परिसर से बाहर चले गए. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि तोड़फोड़ के दौरान कार्यालयों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था.
बालासाहेब जाधव ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि निजी फाइनेंस कंपनियों के एजेंट सुबह 8 बजे से ही गांवों में पहुंचकर किसानों से कर्ज वसूली के लिए दबाव बनाते हैं. उन्होंने कहा कि किसानों को लगातार परेशान किया जा रहा है और स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कुछ ग्रामीण उत्पीड़न से बचने के लिए अपने घर छोड़कर जा रहे हैं.
जाधव ने चेतावनी दी कि अगर कंपनियों के एजेंटों ने गांवों में जाकर जबरन वसूली जारी रखी तो संगठन अपना आंदोलन और तेज करेगा. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर कंपनियों के कार्यालयों में आग लगाने तक की कार्रवाई की जा सकती है.
सहायक पुलिस निरीक्षक आदित्य घोडके ने बताया कि दोनों फाइनेंस कंपनियों की ओर से शिकायत मिलने के बाद तोड़फोड़ की घटनाओं पर कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल पुलिस को कंपनियों की शिकायत का इंतजार है.
फाइनेंस कंपनियों की कथित वसूली और किसानों पर कर्ज चुकाने के दबाव का मुद्दा हाल में दो किसानों की मौत के बाद भी चर्चा में है. नांदेड़ जिले के किसान चंद्रकांत शिंदे पिछले महीने एक फाइनेंस कंपनी के कार्यालय में मृत पाए गए थे. इस मामले में अपहरण और हत्या का केस दर्ज किया गया था. अब तक कंपनी से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
वहीं, लातूर जिले के अंकुलगा रानी गांव में 26 अक्टूबर को दत्तात्रेय कुंभार का शव उनके घर में फंदे से लटका मिला था. पुलिस का कहना है कि वह निजी फाइनेंस कंपनियों से लिए गए कर्ज का भुगतान नहीं कर पाने के कारण परेशान थे. इन घटनाओं के बाद निजी वित्तीय कंपनियों की कर्ज वसूली के तरीकों पर सवाल उठ रहे हैं. (पीटीआई)