एग्रीवेट: 02 नवंबर 2026, गांधीनगर: गुजरात के चार जिले सूखा-प्रभावित घोषित, किसानों के लिए राहत पैकेज का एलान – गुजरात सरकार ने राज्य के चार जिलों — कच्छ, देवभूमि द्वारका, जामनगर और पोरबंदर — को सूखा-प्रभावित घोषित कर दिया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कृषि मंत्री जीतू वाघाणी की मौजूदगी में हुई प्रेस वार्ता में इस फैसले की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि ।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस मॉनसून राज्य में औसतन 89 प्रतिशत बारिश हुई, लेकिन इन चार जिलों में बारिश सामान्य से काफी कम और देरी से हुई। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार इन कठिन समय में किसानों के साथ खड़ी रहेगी।” यह फैसला केंद्र सरकार के 2016 के सूखा प्रबंधन मैनुअल के तहत समीक्षा के बाद लिया गया और छह महीने के लिए लागू रहेगा।
राजस्थान के लेख राम यादव ने जैविक खेती और एग्री-टूरिज्म से बनाया 17 करोड़ का कारोबार—जानें पूरा मामला – एग्रीवेट
राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के मानदंडों के तहत फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये की सहायता दी जाएगी। यह राहत अधिकतम दो हेक्टेयर तक के नुकसान पर ही मिलेगी।
पशुओं के लिए भी राहत का इंतजाम किया गया है। सूखा-घोषित तालुकाओं के पशु शिविरों में रखे पशुओं के लिए दो महीने तक प्रति पशु प्रतिदिन 80 रुपये SDRF फंड से दिए जाएंगे, इसके बाद यह खर्च राज्य सरकार खुद उठाएगी। इसके साथ ही रियायती दर पर चारा भी बांटा जा रहा है — अब तक करीब 1.21 करोड़ किलोग्राम चारा 2 रुपये प्रति किलो की दर पर दिया जा चुका है, जबकि राज्य के पास अभी करीब 3 करोड़ किलोग्राम चारे का भंडार मौजूद है और आगे खरीद भी जारी है।
सूखा-प्रभावित तालुकाओं के ग्रामीण परिवारों को VB-G RAM-G योजना के तहत 150 दिन का रोजगार मिलेगा। यह प्रावधान 1 नवंबर 2026 से लागू हो रहा है।
विशेष परिस्थितियों में चारा वितरण के लिए जिला कलेक्टरों को भी अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं, ताकि स्थानीय जरूरत के हिसाब से तुरंत फैसले लिए जा सकें। हालांकि कुल कितने किसान इस पैकेज से लाभान्वित होंगे और इस पर कुल कितना खर्च आएगा, इसका आंकड़ा अभी सरकार की ओर से सार्वजनिक नहीं किया गया है।
चार जिलों में भी बारिश की कमी एक समान नहीं रही। देवभूमि द्वारका जिले में हालात सबसे खराब रहे, जहां सामान्य औसत बारिश का सिर्फ 16.45 प्रतिशत ही बरसा, यानी यहां करीब 83.55 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज हुई। इस जिले के कल्याणपुर तालुका में हालात और भी गंभीर रहे, जहां सिर्फ 7.86 प्रतिशत बारिश हुई।
पोरबंदर जिले में भी सामान्य बारिश के मुकाबले सिर्फ 30.86 प्रतिशत बारिश हुई, यानी करीब 69 प्रतिशत की कमी रही। जामनगर में 43.26 प्रतिशत और कच्छ में 57.60 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई, जो दोनों ही जिलों में सामान्य से काफी कम है। इन आंकड़ों के आधार पर ही सरकार ने इन चार जिलों को सूखा-प्रभावित मानकर राहत पैकेज का एलान किया।
केंद्र सरकार के 2016 के सूखा प्रबंधन मैनुअल के मुताबिक, किसी भी जिले को सूखा-प्रभावित घोषित करने के बाद यह दर्जा छह महीने तक मान्य रहता है। इस दौरान राज्य सरकार जरूरत पड़ने पर राहत के इंतजामों में बदलाव भी कर सकती है।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में इन जिलों में रबी फसलों की बुवाई पर भी नजर रखी जाएगी, क्योंकि खरीफ सीजन में हुए नुकसान के बाद किसानों के लिए रबी की फसल राहत का बड़ा जरिया बन सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ने पर इन जिलों के लिए अतिरिक्त कदम भी उठाए जा सकते हैं।
कच्छ और सौराष्ट्र का यह इलाका मुख्यतः बारिश पर निर्भर खेती वाला क्षेत्र है, जहां किसान बड़े पैमाने पर मूंगफली, बाजरा और कपास जैसी खरीफ फसलें उगाते हैं। बारिश की कमी का सीधा असर इन्हीं फसलों की पैदावार पर पड़ा है, और इसी वजह से किसान संगठन लंबे समय से राहत पैकेज की मांग कर रहे थे। गांवों में अब किसानों की निगाह इस बात पर है कि सहायता राशि कितनी जल्दी उनके खातों में पहुंचती है।