एग्रीवेट: केले के खेत में मुर्गी की बीट डालते समय सावधानी बरतनी चाहिए. अगर बीट अच्छी तरह सड़ी हुई नहीं है, तो इससे खेत में कीटों और दीमक की समस्या बढ़ सकती है.
मुर्गी की ताजी बीट में ऐसे तत्व होते हैं, जो ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल करने पर पौधों की नाजुक जड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इससे केले के पौधों की बढ़वार रुक सकती है और पत्तियां भी प्रभावित हो सकती हैं.
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अगर किसान मुर्गी की बीट का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो पहले उसे अच्छी तरह सड़ा लेना चाहिए. इसके बाद मिट्टी की जरूरत के हिसाब से सीमित मात्रा में गोबर की खाद के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है.
गाय और भैंस के अच्छी तरह सड़े गोबर की खाद केले के पौधों के लिए अच्छा विकल्प मानी जाती है. इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ते हैं और फायदेमंद जीवों की गतिविधियां बेहतर होती हैं. साथ ही मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है.
गोबर की सड़ी हुई खाद डालने से मिट्टी की पानी रोकने की क्षमता बेहतर हो सकती है. इससे केले के पौधों को पोषक तत्व धीरे-धीरे मिलते रहते हैं. अच्छी मिट्टी और सही पोषण से पौधों की बढ़वार बेहतर होती है.
सिर्फ खाद का प्रकार बदलने से केले का स्वाद या बाजार में उसकी मांग खराब होना जरूरी नहीं है. फल की क्वालिटी और पैदावार मिट्टी की सेहत, पोषक तत्वों की उपलब्धता, सिंचाई और फसल की देखभाल पर भी निर्भर करती है.