MP के 12 जिलों में गेहूं-मूंग की खेती पर लगेगी लगाम? सरकार ने किसानों को दी नई सलाह – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: MP News: मध्य प्रदेश में इस बार कम बारिश और सिंचाई के पानी की कमी को देखते हुए सरकार खेती के तरीके में बदलाव करने की तैयारी कर रही है. राज्य के 12 जिलों में किसानों को गेहूं और गर्मी के मौसम में उगाई जाने वाली मूंग की खेती कम करने के लिए जागरूक किया जाएगा. इसके बदले उन्हें उड़द और चने जैसी फसलें अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कृषि विभाग को इस दिशा में अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं. सरकार का मकसद है कि, उपलब्ध पानी का इस्तेमाल सोच-समझकर हो और किसानों को भी ऐसी फसलें मिलें, जिनसे कम पानी में अच्छी कमाई हो सके.

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम, हरदा, नरसिंहपुर, रायसेन और सीहोर समेत कई जिलों में गेहूं और गर्मी की मूंग बड़े पैमाने पर उगाई जाती है. लेकिन इन फसलों के लिए सिंचाई की जरूरत पड़ती है. खासकर गर्मी की मूंग करीब 60 से 70 दिन में तैयार हो जाती है, लेकिन इस दौरान खेतों में पांच से छह बार पानी देना पड़ सकता है.

ऐसे में अगर जलाशयों में पानी कम हो, तो किसानों के सामने सिंचाई का संकट खड़ा हो सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तवा जलाशय में करीब 87.8 फीसदी और बारना जलाशय में 69.1 फीसदी पानी है. सरकार को आशंका है कि, पानी की मौजूदा स्थिति में गेहूं और गर्मी की मूंग की खेती पर ज्यादा जोर देने से सिंचाई के संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है.

सरकार चाहती है कि, किसान ऐसी फसलों की ओर बढ़ें, जिनमें पानी की जरूरत और खेती का खर्च कम रखा जा सके. इसी वजह से उड़द और चने जैसी फसलों को विकल्प के तौर पर अपनाने के लिए कहा जा रहा है. किसानों को उड़द की पूरी उपज खरीदने का भरोसा भी दिया गया है. हालांकि, खेती में बदलाव करना किसानों के लिए आसान फैसला नहीं होता. उन्हें बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई पर खर्च करना पड़ता है. इसलिए फसल बदलने से पहले किसानों के लिए यह जानना जरूरी है कि नई फसल की बाजार में मांग कैसी है और उसे बेचने पर कितना दाम मिल सकता है.

गर्मी की मूंग की खेती को लेकर एक और सवाल सामने आया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी गोदामों में पिछले तीन-चार साल की करीब 3.75 लाख टन मूंग बिना बिके रखी है. अगर बड़ी मात्रा में मूंग का भंडार पहले से मौजूद है, तो नई फसल की खरीद और बिक्री को लेकर योजना बनाना भी अहम हो जाता है. किसानों को फसल उगाने के साथ-साथ उसके लिए बाजार और खरीद की व्यवस्था का भरोसा मिलना भी जरूरी है.

ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में इस्तेमाल होने वाले कुछ रसायनों को लेकर भी सरकार का ध्यान गया है. केंद्र सरकार ने गर्मी की मूंग में फसल को जल्दी सुखाने के लिए इस्तेमाल होने वाले पैराक्वेट डाइक्लोराइड के उपयोग पर बैन लगाई है. मध्य प्रदेश सरकार ने भी इसके स्टॉक को नष्ट करने और बिक्री पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.

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