एग्रीवेट: Himachal Pradesh एप्पल Farming: हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है. अब प्रदेश के दूरदराज इलाकों में प्राकृतिक तरीके से उगाए जाने वाले सेब को बाजार में अपनी अलग पहचान मिलेगी. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ‘पांगी एप्पल’ (Pangi एप्पल) ब्रांड लॉन्च किया है. इसके तहत किसानों को सेब की पैकिंग के लिए खास कार्टन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिन पर सरकार 50 फीसदी सब्सिडी देगी. सरकार की इस पहल का मकसद पांगी के सेब को अलग ब्रांड के रूप में पहचान दिलाना और किसानों के लिए बेहतर बाजार के अवसर पैदा करना है.
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि पांगी क्षेत्र में पैदा होने वाले सेब अब तक दूसरे इलाकों के नाम से बाजार में बेचे जाते थे. पांगी के सेब की पैकिंग पर अक्सर ‘कुल्लू एप्पल’ या ‘किन्नौर एप्पल’ लिखा होता था. इससे पांगी में पैदा होने वाले सेब को अपनी अलग पहचान नहीं मिल पाती थी. अब सरकार ने ‘पांगी एप्पल’ ब्रांड शुरू किया है, जिससे स्थानीय उत्पाद को बाजार में अलग पहचान मिलेगी और किसानों को नए कारोबारी अवसर मिल सकेंगे.
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मुख्यमंत्री ने बताया कि पांगी के सेब उत्पादकों के लिए विशेष पैकिंग कार्टन तैयार किए गए हैं. ये कार्टन 10 किलो और 20 किलो की क्षमता में उपलब्ध होंगे. खास बात यह है कि सरकार किसानों को इन कार्टन पर 50 फीसदी सब्सिडी देगी. इससे किसानों का पैकिंग खर्च कम होगा. साथ ही एक ही ब्रांड के तहत सेब की बिक्री होने से बाजार में पांगी के उत्पाद की पहचान मजबूत करने में मदद मिलेगी.
आज पांगी घाटी में प्राकृतिक खेती से उत्पादित सेबों के लिए ‘पांगी एप्पल’ ब्रांड लॉन्च किया। प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देकर किसानों की आर्थिकी सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।
– पांगी प्रदेश का पहला प्राकृतिक खेती उपमंडल है। यहां 370 हेक्टेयर भूमि पर 1,04,000 से अधिक सेब के पौधे हैं। इस सीजन में करीब 550 मीट्रिक टन (35,000 पेटियां) उत्पादन की उम्मीद है।
– पहले पांगी के सेब ‘कुल्लू एप्पल’ या ‘किन्नौर एप्पल’ के नाम से बेचे जाते थे। अब 10 और 20 किलोग्राम क्षमता वाले ‘पांगी एप्पल’ कार्टन 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं, जिससे सेबों को अपनी विशिष्ट पहचान मिलेगी।
– यह पहल पांगी को रसायन-मुक्त उपमंडल बनाने के साथ लगभग 6,300 कृषक परिवारों की आजीविका सुदृढ़ करेगी, स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देगी और इस दूरदराज जनजातीय क्षेत्र में नए आर्थिक अवसर सृजित करेगी।
सरकारी जानकारी के मुताबिक, पांगी क्षेत्र में लगभग 370 हेक्टेयर जमीन पर सेब की खेती होती है. यहां सेब के 1.04 लाख से अधिक पौधे लगे हुए हैं. इस सीजन में करीब 35 हजार बॉक्स सेब का उत्पादन होने की उम्मीद है, जो लगभग 550 मीट्रिक टन के बराबर है. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के अनुसार, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और स्थानीय सेब को अलग पहचान दिलाने से क्षेत्र के बागवानों को फायदा हो सकता है.