धान बेचने के बदले नियम, अब OTP से नहीं बनेगी बात! किसानों को करना होगा ये जरूरी काम – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Paddy Procurement Rules: छत्तीसगढ़ में धान बेचने की तैयारी कर रहे किसानों के लिए बड़ी खबर है. इस बार सरकारी खरीदी केंद्रों पर धान बेचने के नियमों में कुछ अहम बदलाव किए गए हैं. अब किसानों को केवल मोबाइल पर आने वाले ओटीपी के भरोसे धान बेचने की सुविधा नहीं मिलेगी. इसके लिए अंगूठे या उंगली के निशान से पहचान की जांच कराना जरूरी होगा. इतना ही नहीं, धान बेचने के लिए मिलने वाले टोकन के नियम भी बदल गए हैं.

अगर किसान टोकन में दर्ज पूरी मात्रा में धान नहीं बेच पाते हैं, तो बचा हुआ धान अगले टोकन में नहीं जोड़ा जाएगा. ऐसे में किसानों के लिए नए नियमों को समझना जरूरी है, ताकि खरीदी केंद्र पर पहुंचने के बाद किसी परेशानी का सामना न करना पड़े.

छत्तीसगढ़ में आगामी धान खरीदी सीजन से किसानों को अपनी पहचान साबित करने के लिए बायोमीट्रिक जांच करानी होगी. आसान भाषा में समझें तो धान बेचते समय किसान को मशीन पर अपनी उंगली या अंगूठा लगाना होगा. पहले किसान मोबाइल पर आने वाले ओटीपी के जरिए भी अपनी पहचान की जांच कराकर धान बेच सकते थे. लेकिन अब केवल ओटीपी वाली व्यवस्था खत्म कर दी गई है. नए नियम के मुताबिक, किसान या उनकी ओर से धान बेचने के लिए अधिकृत व्यक्ति की पहचान अंगूठे या उंगली के निशान से जांची जाएगी. इसलिए किसानों को पहले ही संबंधित समिति से जानकारी ले लेनी चाहिए.

छत्तीसगढ़ सरकार ने धान बेचने के लिए मिलने वाले टोकन की व्यवस्था में भी बदलाव किया है. अब किसी किसान को एक से ज्यादा टोकन मिलते हैं, तो हर टोकन में धान की मात्रा बराबर रखी जाएगी. मान लीजिए किसी किसान के पास 120 क्विंटल धान है और उसे बेचने के लिए दो टोकन मिलते हैं. ऐसे में दोनों टोकन में 60-60 क्विंटल धान दर्ज होगा.

इसी तरह अगर किसान को 300 क्विंटल धान बेचने के लिए तीन टोकन मिलते हैं, तो हर टोकन में 100-100 क्विंटल धान की मात्रा तय होगी. इसलिए किसान टोकन लेते समय उसमें दर्ज धान की मात्रा जरूर देख लें.

नए नियमों में किसानों के लिए सबसे जरूरी बदलाव बची हुई धान की मात्रा को लेकर किया गया है. अगर किसी किसान के टोकन में 100 क्विंटल धान बेचने की अनुमति है, लेकिन वह खरीदी केंद्र पर केवल 80 क्विंटल धान ही बेच पाता है, तो बाकी 20 क्विंटल की मात्रा अपने आप रद्द हो जाएगी. यानी किसान उस बची हुई मात्रा को अगले टोकन में जोड़कर नहीं बेच सकेगा. इसलिए किसानों को सलाह दी गई है कि वे टोकन में जितना धान दर्ज है, उतनी मात्रा की व्यवस्था करने के बाद ही खरीदी केंद्र जाएं.

किसानों को धान बेचने से पहले अपनी खरीदी समिति से नए नियमों की पूरी जानकारी ले लेनी चाहिए. खासकर अंगूठे से पहचान की जांच और टोकन में दर्ज धान की मात्रा को लेकर सावधानी जरूरी है. अगर किसान खुद धान बेचने नहीं जा रहे हैं, तो उनकी ओर से जाने वाले व्यक्ति की पहचान जांचने की व्यवस्था के बारे में पहले ही पूछ लें. साथ ही टोकन जारी होने पर उसमें दर्ज मात्रा अच्छी तरह देख लें, ताकि बाद में कोई परेशानी न हो.

नए नियमों का सीधा असर धान बेचने की प्रक्रिया पर पड़ेगा. अब किसानों को केवल धान तैयार रखने से काम नहीं चलेगा, बल्कि पहचान की जांच और टोकन की मात्रा का भी ध्यान रखना होगा. खासकर जिन किसानों के पास ज्यादा धान है और उन्हें कई टोकन मिलते हैं, उनके लिए हर टोकन के हिसाब से धान पहुंचाना जरूरी होगा. ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही से किसान को परेशानी उठानी पड़ सकती है. इसलिए खरीदी केंद्र जाने से पहले सभी जरूरी जानकारी लेना और धान की मात्रा जांचना बेहतर रहेगा.

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