एग्रीवेट: Maharashtra Sugarcane Crushing: महाराष्ट्र में गन्ने की पेराई का नया सीजन शुरू हो गया है, लेकिन इस बार चीनी मिलों के सामने कई चुनौतियां खड़ी हैं. एक तरफ किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ कहीं कम बारिश और कहीं सूखे जैसे हालात ने गन्ने की फसल पर असर डाला है. ऐसे में इस साल राज्य में चीनी का उत्पादन घटने की आशंका जताई जा रही है.
हालांकि, कुछ मिलों में पेराई शुरू हो चुकी है, लेकिन कई मिलें अभी भी काम शुरू करने का इंतजार कर रही हैं. आने वाले दिनों में गन्ने की उपलब्धता और किसानों के आंदोलन से तय होगा कि, इस बार चीनी मिलों का काम कितनी तेजी से आगे बढ़ता है.
महाराष्ट्र में 2026-27 का गन्ना पेराई सीजन शुरू हो चुका है. 22 अक्टूबर तक राज्य की 65 चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई शुरू कर दी थी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 158 मिलों को पेराई शुरू करने की अनुमति दी जा चुकी है. बाकी मिलों के आवेदन की जांच चल रही है. हालांकि, पश्चिमी महाराष्ट्र में पेराई की रफ्तार अभी धीमी है. इसकी एक बड़ी वजह स्वाभिमानी शेतकरी संगठन का चल रहा आंदोलन है.
कोल्हापुर समेत पश्चिमी महाराष्ट्र के कई इलाकों में किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. इससे चीनी मिलों में पेराई शुरू होने में देरी हो रही है. कोल्हापुर के प्रभारी मंत्री प्रकाश आबिटकर के मुताबिक, जिले में पेराई शुरू कराने को लेकर दो दिनों के भीतर एक बैठक की जाएगी. उम्मीद है कि, बातचीत के बाद मिलों में काम शुरू करने का रास्ता निकल सकता है.
महाराष्ट्र में इस साल चीनी उत्पादन को लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं. चीनी आयुक्त कार्यालय ने राज्य में करीब 90.18 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया है. वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि, इस बार उत्पादन करीब 20 फीसदी घटकर 80 लाख टन रह सकता है. इसके अलावा एग्रीमंडी लाइव ने बारिश और फसल की स्थिति को देखते हुए उत्पादन करीब 75 लाख टन रहने का अनुमान जताया है. हालांकि, ये अभी अनुमान हैं. असली तस्वीर पेराई आगे बढ़ने के बाद ही साफ होगी.
इस बार महाराष्ट्र के कई इलाकों में बारिश एक जैसी नहीं हुई. कुछ जगहों पर पानी की कमी और सूखे जैसे हालात बने रहे. इसका असर गन्ने की बढ़वार और पैदावार पर पड़ सकता है. आमतौर पर इस बार पेराई का सीजन करीब 90 से 100 दिन चलने की उम्मीद है. लेकिन अगर मिलों को पर्याप्त गन्ना नहीं मिला, तो पेराई का काम जल्दी खत्म हो सकता है. ऐसे में किसानों को अपनी फसल बेचने और मिलों को पूरा गन्ना जुटाने में परेशानी हो सकती है.
महाराष्ट्र के किसान संगठन चीनी और एथेनॉल की कीमतें बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. संगठनों का कहना है कि, चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 31 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो किया जाए. इसके अलावा एथेनॉल की कीमत 70 से 75 रुपये प्रति लीटर करने की मांग भी उठाई गई है. किसान संगठन घरेलू इस्तेमाल और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली चीनी के लिए अलग-अलग कीमतें तय करने की मांग कर रहे हैं. साथ ही दो चीनी मिलों के बीच तय दूरी से जुड़ा नियम हटाने और गन्ना किसानों, सहकारी मिलों व मजदूरों की समस्याएं दूर करने की भी मांग है.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किसान संगठनों को भरोसा दिया है कि, चीनी और एथेनॉल की कीमतें बढ़ाने की मांग पर केंद्र सरकार के स्तर पर बैठक कराई जाएगी. इसमें किसान संगठनों और चीनी मिलों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. फडणवीस ने सांगली दौरे के दौरान किसान प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी. इस दौरान प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर ज्ञापन भी सौंपा.