Cotton MSP 2026-27: कपास बेचने से पहले जान लें भाव, राज्य में 133 केंद्रों पर होगी खरीद—पढ़ें इनसाइड स्टोरी – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: तेलंगाना में कपास किसानों के लिए खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के दौरान खरीद की तैयारियां तेज हो गई हैं. राज्य में इस बार करीब 48.20 लाख एकड़ में कपास की खेती हुई है और 29.43 लाख मीट्रिक टन उत्पादन होने का अनुमान है. किसानों को उनकी उपज का उचित दाम दिलाने के लिए सरकार ने खरीद केंद्र खोलने के निर्देश दिए हैं. इस सीजन कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 8,667 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है, जबकि राज्य में मौजूदा मॉडल बाजार भाव करीब 9,000 रुपये प्रति क्विंटल बताया गया है. ऐसे में किसानों को बाजार भाव और सरकारी खरीद के विकल्पों को समझकर अपनी उपज बेचने का फैसला करना होगा.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के लिए कपास का एमएसपी 8,667 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. वहीं, तेलंगाना में कपास का मौजूदा मॉडल बाजार भाव लगभग 9,000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है. इस हिसाब से बाजार भाव एमएसपी से करीब 333 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है. राज्य सरकार के मुताबिक, कम उत्पादन और भारी मांग के कारण बाजार में कपास की कीमतों को समर्थन मिल रहा है. ऐसे में किसानों के पास अपनी उपज खुले बाजार में बेचने का विकल्प है. हालांकि, बाजार भाव में बदलाव हो सकता है, इसलिए बिक्री से पहले स्थानीय मंडी में ताजा भाव की जानकारी लेना जरूरी है.

तेलंगाना सरकार ने कपास की सरकारी खरीद  को सुचारु बनाने के लिए अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए हैं. भारतीय कपास निगम (CCI) ने किसानों की सुविधा के लिए खरीद केंद्रों की संख्या 122 से बढ़ाकर 133 कर दी है. इसके अलावा, राज्य की 356 जिनिंग मिलों में से 30 जिलों की 335 मिलों को खरीद केंद्र के रूप में अधिसूचित किया गया है. कृषि एवं विपणन मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने सचिवालय में खरीद तैयारियों की समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों को समय पर खरीद, किसानों को जल्द भुगतान और विपणन विभाग तथा सीसीआई के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं.

कपास किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बाजार  की स्थिति के अनुसार फैसला लेने का विकल्प मिलेगा. यदि खुले बाजार में कपास का भाव एमएसपी से अधिक रहता है, तो किसान मंडी में अपनी उपज बेच सकते हैं. वहीं, बाजार भाव एमएसपी से नीचे आने पर वे सीसीआई के खरीद केंद्रों पर निर्धारित शर्तों के अनुसार कपास बेच सकते हैं. सरकार ने खरीद केंद्रों पर गुणवत्ता जांच, भंडारण और परिवहन की व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए हैं. साथ ही, राज्य और जिला स्तर पर गठित समितियां बाजार भाव तथा खरीद प्रक्रिया की निगरानी करेंगी. सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और भुगतान में देरी रोकना है.

कपास खरीद प्रक्रिया  में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल सत्यापन और ऑनलाइन भुगतान प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, 21 अक्टूबर 2026 तक ‘कपास किसान’ ऐप पर 12.75 लाख किसानों का विवरण जोड़ा जा चुका है. किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए मार्केट यार्डों में हेल्प डेस्क भी स्थापित किए जाएंगे. सरकार ने किसानों को सलाह दी है कि वे खरीद केंद्र पर कपास लाने से पहले उसकी गुणवत्ता और नमी की जांच कर लें, ताकि तय मानकों के अनुसार खरीद प्रक्रिया पूरी हो सके. इसके अलावा, राज्य सरकार कपास की स्थानीय मांग बढ़ाने के लिए प्रसंस्करण, कताई और तेल उद्योगों के विस्तार की संभावनाओं पर भी काम कर रही है. इससे कपास की खपत बढ़ाने और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है.

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