एग्रीवेट: पंजाब की अनाज मंडियों में किसानों ने फसल की तौल के लिए पुराने तराजू के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं. किसानों का आरोप है कि सही तौल नहीं होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. उन्होंने मंडियों में फसल की खरीद के दौरान डिजिटल तौल मशीनों का इस्तेमाल करने की मांग की है. किसानों के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों के बार-बार निर्देश देने के बावजूद मंडियों में अब भी पुराने तराजू का इस्तेमाल हो रहा है. उनका कहना है कि इन तराजू में आसानी से गड़बड़ी की जा सकती है, जिससे फसल का वजन गलत दर्ज हो सकता है. किसानों ने यह भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई बार उन्हें बेची गई फसल की पूरी मात्रा के हिसाब से भुगतान नहीं मिलता.
लुधियाना के किसान तरसेम सिंह ने द ट्रिब्यून से कहा कि पुराने तराजू से फसल की तौल में गड़बड़ी की जा सकती है. इससे फसल का वजन सही दर्ज नहीं होता और किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. उन्होंने कहा कि हाथ से चलने वाले तराजू से तौल में पारदर्शिता भी नहीं रहती. एक अन्य किसान गुरबख्शिश सिंह ने कहा कि किसान कई साल से इस समस्या को उठा रहे हैं. डिजिटल तौल मशीनें लगाने के निर्देश दिए जाने के बावजूद आढ़ती अब भी पुराने तराजू का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है.
वहीं, आढ़तियों का कहना है कि कई अनाज मंडियों में डिजिटल मशीनें चलाने के लिए बिजली के उचित इंतजाम नहीं हैं. इसके अलावा, कुछ मंडियों में जमीन समतल नहीं है. ऐसे में डिजिटल तौल मशीनों को लगाना और उनसे सही वजन करना मुश्किल होता है. आढ़ती दविंदर सिंह ने कहा कि जब तक मंडियों में बिजली और जमीन से जुड़ी समस्याएं दूर नहीं होंगी, तब तक डिजिटल तौल मशीनों को अपनाना मुश्किल रहेगा.
लुधियाना के जिला मंडी अधिकारी गुरमतपाल सिंह ने कहा कि आढ़तियों को डिजिटल तौल मशीनों का इस्तेमाल करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं. हालांकि, आढ़ती इन्हें अपनाने में व्यावहारिक दिक्कतों और दूसरी समस्याओं का हवाला दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर किसी किसान को अपनी फसल की तौल पर शक है, तो वह मंडी बोर्ड से संपर्क कर सकता है. हर मंडी में डिजिटल तौल मशीन उपलब्ध है. किसान इस मशीन से अपनी फसल की दोबारा तौल करा सकता है.