खेत बचाओ अभियान की शुरुआत, कृषि मंत्री ने खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के 3 फॉर्मूले बताए – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को खेत की मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने का फॉर्मूला बताते हुए कहा कि बीजामृत और घनजीवामृत से प्राकृतिक खेती अपनाएं. इससे लागत घटेगी, जबकि पैदावार बढ़ेगी. इसकी शुरुआत ​कम से कम आधे एकड़ से करें. उन्होंने कहा कि अंधाधुंध केमिकल फर्टिलाइजर और कीटनाशकों के इस्तेमाल से मिट्टी को बंजर होने से बचाना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है. ​इस दिशा में हरियाणा के मेहनती किसानों ने पूरे देश को नई राह दिखाई है और मध्य प्रदेश में भी जाकर खेती की तस्वीर बदल रहे हैं. उन्होंने कहा कि किसान फसल चक्र अपनाएं और पराली जलाकर मित्र कीटों व केंचुओं को न मारें.

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने खाद की कीमतों और सरकारी प्रतिबद्धता पर कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद केंद्र सरकार किसानों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दे रही है. सरकार डेढ़ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की फर्टिलाइजर सब्सिडी वहन कर रही है, ताकि किसानों को यूरिया की बोरी मात्र 266 रुपये और डीएपी 1350 रुपये में मिलती रहे. उन्होंने कहा कि सस्ती खाद मिलने का मतलब यह कतई नहीं है कि हम खेतों में चार-चार कट्टे यूरिया डालते चले जाएं. यह भ्रम है कि ज्यादा खाद डालने से ज्यादा फसल होगी. उन्होंने कहा कि देश अब ग्रीन अमोनिया के प्रयोग की ओर बढ़ रहा है, जिससे भारत भविष्य में उर्वरक उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगा.

रासायनिक खेती के गंभीर दुष्परिणामों पर शिवराज सिंह ने कहा कि जहरीले कीटनाशकों और अनियंत्रित खादों से पैदा हुआ अन्न खाकर आज इंसान का शरीर गंभीर बीमारियों का घर बनता जा रहा है. उन्होंने कहा कि जीने के लिए हवा, पानी और अन्न चाहिए और शास्त्रों में अन्न को ब्रह्म माना गया है. यदि यह अन्न ही अशुद्ध हो गया तो मानव सभ्यता का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि आज यह लड़ाई केवल मिट्टी की नहीं, बल्कि खेत और इंसान दोनों के जीवन को बचाने की मुहिम है.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि खेतों में पराली जलाना आत्मघाती है.आग लगाने से न केवल वायु प्रदूषण फैलता है, बल्कि मिट्टी की ऊपरी और निचली सतह में रहने वाले खरबों सूक्ष्म जीवाणु, मित्र कीट और प्राकृतिक खाद बनाने वाले केंचुए भी जलकर नष्ट हो जाते हैं. केंचुओं और मित्र कीटों की सुरक्षा से ही जमीन की प्राकृतिक उर्वरता बरकरार रह सकती है. उन्होंने कहा कि हरियाणा के किसान पराली प्रबंधन करके अपनी अतिरिक्त कमाई भी कर पा रहे हैं.

कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक, वैज्ञानिकों और अधिकारियों से आह्वान किया कि वे 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक प्रयोगशालाओं और दफ्तरों से निकलकर गांव-गांव जाएं. किसानों के बीच चौपाल लगाकर उन्हें मिट्टी के स्वास्थ्य और संतुलित खेती का महत्व समझाएं. उन्होंने संकल्प व्यक्त किया कि वे स्वयं भी इस अभियान में लगातार जमीनी स्तर पर सक्रिय रहेंगे ताकि भारत की धरती को बंजर होने से बचाया जा सके.

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