दुबई भेजी जाएगी 700 टन हरी मिर्च, फिरोजपुर के किसानों को गेहूं से छह गुना ज्यादा कमाई की उम्मीद – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: पंजाब के फिरोजपुर के किसानों ने हरी मिर्च की खेती से कमाई बढ़ाने की तैयारी की है. अप्रैल 2026 में दुबई को 15 टन हरी मिर्च का निर्यात करने के बाद किसानों ने अगले साल 700 टन मिर्च विदेश भेजने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए उन्होंने खेती का रकबा पिछले सीजन के 20 एकड़ से बढ़ाकर 60 एकड़ कर दिया है. किसानों को एक एकड़ से करीब 2.68 लाख रुपये की कमाई होने की उम्मीद है. यह कमाई गेहूं की खेती से होने वाली कमाई से लगभग छह गुना ज्यादा है.

फिरोजपुर की सरागढ़ी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने इस बार भी उसी भारतीय कंपनी के साथ निर्यात का समझौता  किया है, जिसने पिछले सीजन में किसानों की हरी मिर्च दुबई भेजी थी. समझौते के तहत मिर्च 29 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदी जाएगी. किसान हरी मिर्च की गौरी किस्म उगा रहे हैं. इससे औसतन 120 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन मिलने की उम्मीद है. 60 एकड़ में खेती के हिसाब से कुल उत्पादन करीब 720 टन तक पहुंच सकता है. किसानों ने निर्यात के लिए 700 टन मिर्च भेजने की योजना बनाई है.

सरागढ़ी कंपनी के अध्यक्ष बलविंदर सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि किसानों ने निर्यात के लिए हरी मिर्च की खेती का रकबा बढ़ाया है. इसके साथ ही वे दूसरे किसानों को भी खेती के सही तरीकों और गुणवत्ता के जरूरी मानकों की जानकारी दे रहे हैं. इससे दूसरे किसान भी अपनी उपज को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने के लिए तैयार हो सकेंगे. सरागढ़ी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के अध्यक्ष बलविंदर सिंह ने बताया कि पिछले साल किसानों ने 20 एकड़ में करीब 240 टन हरी मिर्च उगाई थी. इसमें से लगभग 15 टन मिर्च दुबई भेजी गई थी. पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण निर्यात के लिए कंटेनर नहीं मिल पाए. ऐसे में निर्यात करने वाली कंपनी ने बाकी मिर्च घरेलू बाजार में बेच दी. हालांकि, किसानों को उनकी उपज का वही दाम दिया गया, जो निर्यात के लिए तय हुआ था.

सिंह के मुताबिक, इस साल किसान करीब 60 एकड़ में उगाई गई 700 टन से ज्यादा हरी मिर्च कंपनी को सौंपेंगे. अब यह देखना होगा कि कंपनी इसमें से कितनी मिर्च विदेश भेज पाती है. उन्होंने कहा कि समझौते के मुताबिक, कंपनी किसानों को उनकी उपज का तय दाम देगी. बलविंदर सिंह ने बताया कि अगर मौसम अनुकूल रहा, तो हरी मिर्च की पैदावार बढ़कर 150 से 200 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच सकती है. हालांकि, औसतन 120 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि किसान निर्यात के लिए खेती करने के इच्छुक दूसरे किसानों को भी जरूरी प्रक्रियाओं और गुणवत्ता के मानकों की जानकारी दे रहे हैं. इससे उन्हें विदेशी बाजारों के लिए उपज तैयार करने में मदद मिलेगी. किसान समूह के मुताबिक, सरागढ़ी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी में 11 सदस्य हैं. इसके अलावा करीब 50 अन्य किसान भी इस पहल से जुड़ चुके हैं.

हरी मिर्च की खेती किसानों के लिए गेहूं के मुकाबले ज्यादा कमाई का विकल्प बन सकती है. सरागढ़ी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के अध्यक्ष बलविंदर सिंह के मुताबिक, 29 रुपये प्रति किलो के तय भाव पर एक एकड़ में 120 क्विंटल हरी मिर्च बेचने से करीब 3.48 लाख रुपये की कुल कमाई हो सकती है. इसमें से बीज, खाद, कीटनाशक, खेत की तैयारी और मजदूरी जैसे खर्चों पर लगभग 80 हजार रुपये लगेंगे. इस तरह किसान को एक एकड़ से करीब 2.68 लाख रुपये बचने का अनुमान है. सिंह ने बताया कि मिर्च के पौधों के बीच प्याज और लहसुन की खेती करके किसान अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं. इससे मिर्च की खेती पर होने वाले खर्च का कुछ हिस्सा भी निकाला जा सकता है.

हरी मिर्च की नर्सरी तैयार करने का काम अक्टूबर में शुरू होता है. इसके बाद नवंबर में पौधों की खेत में रोपाई  की जाती है. फसल की पहली तुड़ाई अप्रैल के आसपास शुरू होने की उम्मीद रहती है. मौसम और फसल की स्थिति के हिसाब से तीन से पांच बार मिर्च की तुड़ाई की जा सकती है. आमतौर पर हर तुड़ाई के बीच करीब 15 दिन का अंतर रहता है. अगर हरी मिर्च का पूरा उत्पादन विदेश नहीं भेजा जाता, तो किसान उसे घरेलू बाजार में बेच सकते हैं. पंजाब में हर साल करीब 19,661 हेक्टेयर क्षेत्र में हरी मिर्च उगाई जाती है. इससे लगभग 2,94,915 मीट्रिक टन उत्पादन होता है.

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