हरियाणा में धान खरीद में देरी से किसान परेशान, सड़क किनारे पड़ी उपज.. अब मुआवजे की उठी मांग – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: हरियाणा के कैथल जिले की ढांड अनाज मंडी में धान की खरीद में देरी और बारिश से फसल खराब होने के कारण किसान परेशान हैं. मंडी में जगह की कमी के चलते किसानों को अपनी उपज सड़क किनारे खुले आसमान के नीचे रखनी पड़ रही है. इस अव्यवस्था को लेकर भारतीय किसान यूनियन मान गुट के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर गुणी प्रकाश ने नाराजगी जताई है. उन्होंने किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की है. साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा से किसानों को बारिश से बर्बाद हुई धान की फसल के लिए 10 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने और फसल की तुरंत खरीद शुरू कराने की मांग की है. उन्होंने बताया कि वे 18 अक्टूबर को धान खरीद की समस्या को लेकर मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे.

किसान नेता गुणी प्रकाश ने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि दंड, पपणावा, फराल और चंदलाना समेत आसपास के गांवों में किसानों को फसल बेचने में परेशानी हो रही है. मंडी में फसल रखने के लिए जगह नहीं बची है. वहीं, बारिश के कारण किसानों की फसल को भी नुकसान पहुंचा है. किसानों का कहना है कि फसल खराब होने के बावजूद उसकी खरीद और रखरखाव के लिए उचित व्यवस्था नहीं है. वहीं, बारिश के चलते एक किसान की फसल भीग गई, जिससे उसे एक ट्रॉली उपज का नुकसान हुआ. आलम यह है कि मंडी में फसल खरीदने के लिए खरीदार भी नहीं पहुंच रहे हैं. ऐसे में किसानों को डर है कि अगर जल्द खरीद नहीं हुई, तो बची हुई फसल भी खराब हो सकती है.

मंडी में अनाज की खरीद नहीं होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. किसानों का कहना है कि उनकी फसल पिछले 15 दिनों से मंडी में पड़ी है, लेकिन अब तक खरीद नहीं हुई है. इस दौरान उन्हें अनाज रखने और ढुलाई पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है. एक किसान के मुताबिक, 15 दिनों में उसे करीब 4,500 रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा है. किसानों का कहना है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अनाज खरीदने की बात करती है, लेकिन मंडी में उनकी उपज नहीं खरीदी जा रही है. एक किसान ने कहा कि उन्हें प्रति क्विंटल 2,461 रुपये मिलने की जानकारी दी गई थी. वहीं, खरीद में देरी और भुगतान को लेकर भी किसानों में नाराजगी है.

किसानों ने कहा कि उन्हें अपनी फसल का पूरा उचित मूल्य मिलना चाहिए. उनका कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन उपज बेचने में परेशानी होने से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो रही है. कुछ किसानों ने यह भी बताया कि निजी खरीदार कम कीमत पर अनाज खरीदने की बात कर रहे हैं, जबकि सरकारी खरीद नहीं होने से वे अपनी फसल बेच नहीं पा रहे हैं. किसानों ने मुख्यमंत्री से मंडियों में खरीद व्यवस्था दुरुस्त करने और फसल का उचित मूल्य दिलाने की मांग की है. उनका कहना है कि अगर जल्द खरीद शुरू नहीं हुई, तो उन्हें और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

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