एग्रीवेट: महाराष्ट्र में इस साल मॉनसून के दौरान सामान्य से कम बारिश हुई है. इससे पानी की उपलब्धता और रबी फसलों की खेती पर असर पड़ने की आशंका है. आने वाले समय में खाद्य पदार्थों की कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, संभावित रूप से मजबूत अल नीनो के कारण सर्दियों में सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ सकती है. ऐसे महाराष्ट्र में जून से सितंबर के बीच 804.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 994.5 मिलीमीटर है. इस तरह राज्य में सामान्य से करीब 19 फीसदी कम बारिश हुई. राज्य के कुल 36 जिलों में से 19 जिलों में बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई.
क्षेत्रवार देखें तो मराठवाड़ा में सबसे कम बारिश हुई. यहां सामान्य से 39 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई. वहीं, विदर्भ में बारिश की कमी 27 फीसदी रही. इसके मुकाबले कोंकण क्षेत्र में स्थिति बेहतर रही. यहां के सात जिलों में से केवल एक जिले में सामान्य से कम बारिश हुई. कम बारिश और संभावित रूप से मजबूत अल नीनो के कारण आने वाले महीनों में पानी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है. इसका असर रबी फसलों की पैदावार पर पड़ने के साथ खाद्य पदार्थों की कीमतों को भी प्रभावित कर सकता है.
कम बारिश से फसल प्रभावित
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र में कम बारिश का असर अगले फसल सीजन पर भी पड़ सकता है. मिट्टी में नमी कम होने, भूजल का स्तर बढ़ाने के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने और जलाशयों में पानी घटने से सिंचाई की जरूरत बढ़ सकती है. इससे किसानों की परेशानी बढ़ने की आशंका है. मुंबई और आसपास के महानगर क्षेत्र में पानी की उपलब्धता जलाशयों में मौजूद पानी, आगे होने वाली बारिश से मिलने वाले पानी और मांग पर निर्भर करेगी. क्लाइमेट ट्रेंड्स के 16 अक्टूबर के विश्लेषण के मुताबिक, महाराष्ट्र उन पांच राज्यों में शामिल है, जिन्होंने सूखे की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि है. इन राज्यों में तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और राजस्थान भी शामिल हैं. हालांकि, महाराष्ट्र के 75 फीसदी हिस्से में सूखे के दावे की पुष्टि संबंधित सरकारी अधिसूचना से किया जाना जरूरी है.
धान का रकबा कम होने से बढ़ी चिंता
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 8 अक्टूबर तक निगरानी वाले 178 जलाशयों में पानी का भंडार पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 78.71 फीसदी और सामान्य स्तर का 87.08 फीसदी था. पश्चिमी क्षेत्र के जलाशयों में पानी का भंडार सामान्य स्तर का 82.42 फीसदी दर्ज किया गया. इससे पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है. वहीं, 5 अक्टूबर तक देश में धान की खेती का रकबा पिछले कृषि वर्ष 2025-26 की इसी अवधि के मुकाबले 15.56 लाख हेक्टेयर कम रहा. महाराष्ट्र में भी धान का रकबा 1.15 लाख हेक्टेयर घट गया. गन्ने और कपास की खेती के क्षेत्र में भी कमी दर्ज की गई है. दूसरी ओर, दलहन और तिलहन फसलों का रकबा बढ़ा है. इसे कम पानी की जरूरत वाली फसलों की ओर संभावित बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, खेती का रकबा घटने या बढ़ने से अंतिम उत्पादन में होने वाले बदलाव का पता सीधे तौर पर नहीं चलता.
पूर्वोत्तर भारत में 25.6 फीसदी बारिश की कमी
भारत में इस साल मॉनसून के दौरान सामान्य से 13 फीसदी कम बारिश हुई. एक विश्लेषण के मुताबिक, यह पिछले एक दशक में मॉनसून का सबसे कमजोर प्रदर्शन है. पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश की सबसे ज्यादा कमी दर्ज की गई. यहां 1,367.3 मिलीमीटर की सामान्य बारिश के मुकाबले केवल 1,017.1 मिलीमीटर बारिश हुई. यानी बारिश में 25.6 फीसदी की कमी रही. वर्ष 1901 के बाद इस क्षेत्र में मॉनसून की यह सबसे कम बारिश है.
कई राज्यों में भी मॉनसून कमजोर रहा