90 दिन में तैयार होगी तोरिया की फसल, बीज पर मिल रही 55 फीसदी सब्सिडी—जानें पूरा मामला – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Toria Farming: रबी सीजन में किसान गेहूं, सरसों, चना और मसूर जैसी फसलों के साथ तोरिया यानी लहिया की खेती करके अतिरिक्त आमदनी का विकल्प अपना सकते हैं. यह फसल करीब 90 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. खास बात यह है कि किसानों को कृषि विभाग की ओर से तोरिया के बीज पर करीब 55 प्रतिशत अनुदान भी दिया जा रहा है. इससे खेती की शुरुआती लागत कम करने में मदद मिल सकती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, सही समय पर बुवाई, बीज उपचार, खेत की तैयारी और सिंचाई का उचित प्रबंधन करके किसान तोरिया की फसल से बेहतर उत्पादन ले सकते हैं. आइए जानते हैं तोरिया की खेती का सही तरीका, बीज की मात्रा, संभावित पैदावार और सब्सिडी पर बीज लेने से जुड़ी जरूरी जानकारी.

तोरिया तिलहन वर्ग  की फसल है, जिसे किसान कम समय में तैयार होने के कारण रबी सीजन में अपना सकते हैं. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, जिन किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली फसल की जरूरत है, उनके लिए तोरिया एक विकल्प हो सकती है. इसकी फसल सामान्य तौर पर करीब 90 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. इससे किसान कम समय में उपज प्राप्त कर सकते हैं और बाजार में बेचकर अतिरिक्त आमदनी हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं. हालांकि, फसल की अवधि और उत्पादन पर मौसम, मिट्टी, बीज की किस्म और खेती के तरीके का असर पड़ता है. इसलिए किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु के अनुकूल किस्म का चयन करना चाहिए.

तोरिया की खेती  में अच्छी शुरुआत के लिए खेत की तैयारी और बीज की सही मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए. खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि बारिश या सिंचाई के बाद पानी जमा न रहे. एक हेक्टेयर क्षेत्र में तोरिया की बुवाई के लिए करीब 4 किलोग्राम बीज पर्याप्त हो सकता है. बुवाई के दौरान कतार से कतार की दूरी 30 से 40 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. बीज को करीब 4 से 5 सेंटीमीटर की गहराई पर बोना उचित रहता है. बुवाई से पहले बीज का अनुशंसित तरीके से उपचार करना भी जरूरी है. इससे बीज जनित रोगों का खतरा कम करने और बेहतर अंकुरण में मदद मिल सकती है.

तोरिया की खेती में उत्पादन  बढ़ाने के लिए फसल की नियमित देखभाल जरूरी है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, सही कृषि प्रबंधन के साथ एक हेक्टेयर खेत से लगभग 10 से 15 क्विंटल तक पैदावार मिल सकती है. हालांकि, वास्तविक उत्पादन मिट्टी की उर्वरता, मौसम, बीज की गुणवत्ता और फसल की देखभाल पर निर्भर करेगा. फसल में खरपतवार दिखाई देने पर समय रहते नियंत्रण करना चाहिए. इसके लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उचित उपाय अपनाए जा सकते हैं. तोरिया की फसल में जरूरत के मुताबिक आमतौर पर एक से दो सिंचाई की आवश्यकता हो सकती है. सिंचाई का समय मिट्टी में नमी और मौसम की स्थिति देखकर तय करना चाहिए. किसानों को संतुलित खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल मिट्टी की जांच तथा कृषि विभाग की सलाह के आधार पर करना चाहिए.

तोरिया की खेती करने वाले किसानों के लिए बीज  पर मिलने वाला अनुदान शुरुआती लागत कम करने का अवसर है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कृषि विभाग में तोरिया के बीज की कीमत 117 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई है. इस पर करीब 55 प्रतिशत सब्सिडी मिलने से किसान को एक किलोग्राम बीज लगभग 64 रुपये में पड़ सकता है. हालांकि, अनुदान की वास्तविक राशि, पात्रता और बीज की उपलब्धता सरकारी नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है. किसानों को बीज खरीदने से पहले संबंधित कृषि विभाग से इसकी पुष्टि करनी चाहिए. अनुदान पर बीज लेने के लिए किसान विभाग में बुकिंग और पंजीकरण की प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. सही किस्म का चुनाव, उचित दूरी पर बुवाई और समय पर देखभाल करके किसान तोरिया की खेती से बेहतर उत्पादन लेने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं.

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