महाराष्ट्र में सूखा प्रभावित फसलों का 80 फीसदी आकलन पूरा, दिवाली से पहले किसानों को मिलेगा मुआवजा – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: महाराष्ट्र के पुणे जिले में सूखा प्रभावित इलाकों में फसल नुकसान का करीब 80 फीसदी आकलन पूरा हो चुका है. जिला प्रशासन रविवार तक बाकी काम पूरा करने में जुटा है, ताकि राज्य सरकार दिवाली से पहले पात्र किसानों को आर्थिक मदद दे सके. हालांकि, कुछ इलाकों में किसानों को फसल नुकसान की जानकारी दर्ज कराने में परेशानी हो रही है. किसानों के मुताबिक, कृषि विभाग के सहायक अधिकारियों ने उन्हें खराब फसलों की जियो-टैगिंग वाली तस्वीरें अपलोड करने और जरूरी दस्तावेज जमा करने को कहा है. लेकिन कुछ किसानों को फोटो की जियो-टैगिंग करने और दस्तावेज अपलोड करने में दिक्कत आ रही है. इससे नुकसान के आकलन में देरी होने की आशंका है.

खेड़ तहसील के किसान कार्यकर्ता शांताराम सरवाड़े ने द टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि जिन किसानों को स्मार्टफोन और मोबाइल ऐप चलाने की जानकारी नहीं है, उन्हें डिजिटल प्रक्रिया पूरी करने में परेशानी हो रही है. ऐसे किसान दूसरे लोगों की मदद लेने को मजबूर हैं. इससे फसल नुकसान के आकलन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. हालांकि, सूखा प्रभावित जिलों में फसल नुकसान का आकलन करने के लिए राजस्व, ग्रामीण विकास और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें पिछले करीब 15 दिनों से काम कर रही हैं. इसके बावजूद कुछ इलाकों में किसानों को फसल नुकसान का पंचनामा कराने में परेशानी हो रही है.

जिला कलेक्टर जितेंद्र दुड़ी ने कहा कि प्रशासन रविवार तक बाकी काम पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है. इसके बाद किसानों को आर्थिक सहायता देने के लिए राज्य सरकार से फंड मांगा जाएगा. वहीं, हाल ही में सूखा प्रभावित घोषित जुन्नर और अंबेगांव तालुकों में अब तक 60 से 70 फीसदी पंचनामा पूरा हो चुका है. प्रशासन बाकी काम जल्द पूरा करने की कोशिश कर रहा है, ताकि पात्र किसानों को समय पर आर्थिक मदद मिल सके.

जिला प्रशासन ने सूखा प्रभावित घोषित होने से पहले ही जुन्नर और अंबेगांव तालुकों में फसल नुकसान का आकलन शुरू कर दिया था. जिला कृषि कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कृषि सहायकों के लिए अपने क्षेत्र के हर गांव में जाकर फसल नुकसान का जायजा लेना मुश्किल हो रहा है. कुछ अधिकारियों के जिम्मे 10 गांव तक हैं. ऐसे में किसानों से खराब फसलों की जियो-टैगिंग वाली तस्वीरें  और जरूरी दस्तावेज भेजने को कहा गया है. हालांकि, इस प्रक्रिया में आ रही दिक्कतों से आकलन का काम प्रभावित हो रहा है.

जिला प्रशासन अगले साल बारिश की कमी की आशंका को देखते हुए पानी के बेहतर प्रबंधन की योजना  भी बना रहा है. जिला कलेक्टर जितेंद्र दुड़ी ने कहा कि मौसम के अनुमान के मुताबिक, दिसंबर से अल नीनो का प्रभाव बढ़ सकता है. इससे अगले मॉनसून के समय पर असर पड़ने की आशंका है. उन्होंने कहा कि प्रशासन बांधों में उपलब्ध पानी का आकलन कर रहा है. साथ ही, 31 अगस्त 2027 तक पानी का इस्तेमाल किस तरह किया जाए, इसकी योजना बनाई जा रही है. इसका उद्देश्य लंबे समय तक बारिश नहीं होने की स्थिति में पानी की उपलब्धता बनाए रखना है.

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