एग्रीवेट: भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने चाय में दो कीटनाशकों के अवशेष की अधिकतम सीमा तय करने का प्रस्ताव दिया है. इनमें एसिटामिप्रिड (Acetamiprid) और इमिडाक्लोप्रिड (Imidacloprid) शामिल हैं. इसका मकसद फसलों को कीटों से बचाने की जरूरत और उपभोक्ताओं की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को एक आधिकारिक बयान में कहा कि FSSAI ने इस संबंध में नियमों में बदलाव का मसौदा जारी किया है. इसके तहत चाय में इन दोनों कीटनाशकों के अधिकतम अवशेष स्तर (MRL) तय करने का प्रस्ताव है. मंत्रालय के मुताबिक, यह पहल खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों को वैज्ञानिक आधार पर बेहतर बनाने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के प्रयासों का हिस्सा है.
इस प्रस्ताव से चाय की खेती करने वाले किसानों, प्रसंस्करण कंपनियों, खाद्य कारोबारियों, जांच प्रयोगशालाओं और संबंधित अधिकारियों को नियमों को समझने और उनका पालन करने में आसानी होगी. वहीं, चाय में इमिडाक्लोप्रिड की अधिकतम सीमा तय करने के लिए अंतरराष्ट्रीय खाद्य मानक आयोग (Codex) के मानकों को भी आधार बनाया गया है. इसका उद्देश्य चाय में कीटनाशकों के अवशेष की निगरानी और खाद्य सुरक्षा के नियमों को स्पष्ट बनाना है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, कीटनाशक खेती में फसलों को कीटों से बचाने के लिए जरूरी हैं. इनका सही तरीके और तय मानकों के अनुसार इस्तेमाल करने से फसल को नुकसान से बचाने, पैदावार बनाए रखने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलती है. हालांकि, खाद्य पदार्थों में इनके अवशेष की मात्रा पर निगरानी रखना भी जरूरी है. मंत्रालय के अनुसार, भारत में प्रति हेक्टेयर कीटनाशकों का औसत इस्तेमाल 0.5 किलोग्राम से कम है, जबकि दुनिया में इसका औसत 2.38 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है. यानी भारत में कीटनाशकों का औसत इस्तेमाल वैश्विक औसत से काफी कम है.