सितंबर में खाद्य महंगाई बढ़कर 7.74 फीसदी पर पहुंची, प्याज की कीमतों में 108 प्रतिशत का उछाल – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: देश में खाद्य महंगाई लगातार बढ़ रही है. सितंबर 2026 में खाद्य महंगाई दर बढ़कर 7.74 फीसदी हो गई, जबकि अगस्त में यह 5.97 फीसदी थी. इस दौरान प्याज की कीमतों में एक साल के मुकाबले दोगुने से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई. खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने से खुदरा महंगाई दर भी बढ़कर 5.54 फीसदी पर पहुंच गई. नए नए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के मुताबिक, आधार वर्ष 2024 को मानकर देखें तो खुदरा महंगाई अक्टूबर 2024 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है.

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से 12 अक्टूबर को जारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में प्याज की महंगाई  दर बढ़कर 108.09 फीसदी हो गई. अगस्त में यह 48.78 फीसदी थी. इस दौरान अदरक की कीमतों में सालाना आधार पर 62.85 फीसदी, लहसुन में 54.62 फीसदी और नींबू में 36.41 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. हालांकि, सभी सब्जियों की कीमतें नहीं बढ़ीं. सितंबर में आलू के दाम पिछले साल के मुकाबले 11.50 फीसदी और टमाटर के दाम 8.62 फीसदी कम रहे.

देश में सितंबर 2026 के दौरान शहरों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई ज्यादा रही. गांवों में खाद्य महंगाई दर 8.06 फीसदी दर्ज की गई, जबकि शहरी इलाकों में यह 7.18  फीसदी रही. इसी तरह, ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 6.08 फीसदी पहुंच गई. शहरों में यह 4.88 फीसदी रही. ग्रामीण और शहरी महंगाई के बीच यह अंतर इसलिए अहम है, क्योंकि कम आय वाले परिवार अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा खाने-पीने की चीजों पर खर्च करते हैं. ऐसे में खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने से ग्रामीण परिवारों पर ज्यादा असर पड़ सकता है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ी हैं.

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के खाद्य मूल्य सूचकांक  के मुताबिक, सितंबर में यह 136 अंक पर पहुंच गया. अगस्त के मुकाबले इसमें 1.5 फीसदी और पिछले साल सितंबर के मुकाबले 5.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. FAO के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य पदार्थों की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने से उपभोक्ताओं पर असर पड़ सकता है. यह खतरा उन देशों में ज्यादा हो सकता है, जो खाद्य पदार्थों के आयात पर निर्भर हैं. हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि भारत में सितंबर के दौरान सब्जियों की कीमतें बढ़ने की वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार ही था.

खाद्य महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद अब इस बात पर निर्भर करेगी कि नई फसल की आवक से घरेलू बाजार में आपूर्ति कितनी बढ़ती है. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने चेतावनी दी है कि अल नीनो की स्थिति मजबूत होने से फसलों के उत्पादन को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है. इसका असर खासकर दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में धान के उत्पादन पर पड़ सकता है. FAO के अनुमान के मुताबिक, 2026 में दुनिया का कुल अनाज उत्पादन 2025 के मुकाबले 2.1 फीसदी घट सकता है. हालांकि, इसके बावजूद इस साल अनाज की पैदावार अब तक के रिकॉर्ड में दूसरी सबसे बड़ी रहने का अनुमान है.

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