बिना जमीन के खेती कर मिसाल बनी मंजू कश्यप, IFS मॉडल ने बनाया लोकप्रिय, 10 लाख से ज्यादा कमाई – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: दुनियाभर में 15 अक्तूबर को अंतरराष्ट्रीय महिला किसान दिवस के रूप में मनाया जा रहा है. इस अवसर पर किसान इंडिया ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की प्रगतिशील किसान मंजू कश्यप की कहानी जानी है, जो लोगों के लिए खेती के जरिए कमाई के मौके बनाने के तरीके बता रही हैं. वह खुद भी खेती से अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर करने में कामयाब हुई हैं. वह इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम ( IFS मॉडल ) से 10 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई करने वाली महिला किसानों की सूची में भी शामिल हो गई हैं. वह मछली पालन, सिंघाड़ा की खेती, मुर्गी और बत्तख पालन, बागवानी और सब्जी फसलों की खेती करती है. उन्होंने 100 से ज्यादा महिलाओं को खेती के उन्नत तरीकों के लिए प्रशिक्षण भी दिया है और हजारों लोग उनके फॉर्म को देखने पहुंचते हैं. हाल ही में वह महाराष्ट्र की लाल अंगूर किस्म को इंडस्ट्रियल एरिया के बीच खतरनाक केमिकल युक्त मिट्टी और पानी में भी उगाकर चर्चा में हैं.

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के दुहाई गांव की महिला किसान मंजू कश्यप ने किसान इंडिया को बताया कि वह खेती में इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम (IFS) मॉडल अपनाकर अपनी अलग पहचान बनाने में मदद मिली है और लोग उन्हें अब पहचानते हैं और सम्मान देते हैं. उन्होंने कहा कि शुरुआत ऐसी नहीं थी, समाज के लोग दूसरे नजरिए से देखते थे. लेकिन, उनके परिजनों ने समाज के नजरिए को बेड़ियां नहीं बनने दिया है और आज मंजू कश्यप लोगों के लिए प्रेरणा बन गई हैं.

उन्होंने बताया कि उनके पास अपनी कोई जमीन नहीं है. इसलिए खेती में उनका आत्मनिर्भर बनना नामुमकिन सा था. लेकिन, उन्होंने दुहाई इंडस्ट्रियल एरिया में अतिक्रमण करके खत्म किए जा रहे तालाब को लेने के लिए आवेदन किया और उन्हें वह मिल गया. तालाब में इंडस्ट्री के केमिकल से भरे पानी और खराब मिट्टी को सुधारने का संकल्प लिया. इसके लिए उन्होंने अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगाए और आज वह उसी तालाब को अतिक्रमण मुक्त करके 15 बीघे के दायरे में फैला चुकी हैं.

मंजू कश्यप ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) गाजियाबाद के प्रमुख डॉक्टर प्रमोद कुमार से संपर्क किया और आधुनिक खेती के साथ ही जैविक खेती समेत अन्य कृषि संबंधी पहलुओं की ट्रेनिंग ली. यहां सीखी बारीकियों को अपने फार्म पर अपनाया. उन्होंने अपने फार्म पर आड़ू, सेब और लाल अंगूर जैसे पहाड़ी फलों को उगाकर खेती को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में भी काम किया है. औद्योगिक क्षेत्र के आसपास रासायनिक पदार्थों से प्रभावित मिट्टी और पानी की समस्या के बीच उन्होंने जैविक तरीकों से मिट्टी की उर्वरता सुधारने के प्रयास किए. मंजू कश्यप ने बताया कि उन्होंने कहा कि केमिकल युक्त पानी और मिट्टी को ठीक करने के लिए उन्होंने सिंघाड़े की खेती की, जिससे मिट्टी में सुधार हुआ और आज हर तरह की फसलें उगा पा रही हैं.

उन्होंने बताया कि वह तालाब में मछलियों और सिंघाड़े की मुख्य रूप से खेती करती हैं. इससे होने वाली आमदनी से पहले कम मुनाफा होता था. लेकिन, इसे बड़े स्तर पर ले जाने के लिए उन्होंने समेकित खेती का तरीका अपनाया है. वह अपने फार्म पर बागवानी फसलों में ताइवान किस्म का अमरूद उगा रही हैं और करीब 100 पेड़ हैं, जो 12 महीने फल देते हैं. एक पेड़ से लगभग 10 हजार रुपये की आमदनी होती है. इसी तरह से उनके पास 200 से ज्यादा मुर्गे-मुर्गियां, चूजे और बत्तखें हैं. जिनके अंडे आदि से आमदनी होती है. जबकि, महाराष्ट्र के लाल अंगूर, आड़ू, केला, पपीता और सब्जियों में भिंडी, गोभी और हरी सब्जियों की खेती की जा रही है. इससे उनकी सालाना आमदनी 10 लाख रुपये से ज्यादा हो जाती है.

मंजू कश्यप ने बताया कि केवीके के सहयोग से वह अब खुद भी ट्रेनर की भूमिका निभा रही हैं और महिलाओं, कृषि छात्रों को आधुनिक खेती, समेकित कृषि प्रणाली तथा आय बढ़ाने के तरीकों का प्रशिक्षण देती हैं. उन्होंने बताया कि जिला स्तर के साथ ही प्रदेश स्तर पर उन्हें खेती में किए जा रहे योगदान के लिए पुरस्कार मिल चुके हैं. वह पूसा नई दिल्ली के कार्यक्रम में पीएम मोदी ने भी उनके काम की तारीफ की. इसके अलावा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है.

पीएम मोदी से मिलने वाले किसानों के प्रतिनिधिमंडल में शामिल मंजू कश्यप.

मंजू कश्यप ने बताया कि वह अपने फार्म पर पारंपरिक खेती के साथ पशुपालन भी करती हैं. उनका मानना है कि खेती के अलग-अलग तरीकों को एक साथ अपनाकर किसानों की आमदनी बढ़ाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि सरकारी तालाबों का उचित उपयोग छोटे और महिला किसानों के लिए आय का एक अच्छा साधन बन सकता है. उन्होंने महिला किसान दिवस के अवसर पर कहा कि सरकारों को महिला किसानों को खेती में प्रोत्साहित करने के लिए जमीन पट्टे पर देनी चाहिए. इसके साथ ही महिला किसानों को दिए जाने वाले तालाबों का किराया माफ किया जाना चाहिए. इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकेंगी और कृषि क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ेगी. मंजू की कोशिश है कि अधिक से अधिक महिलाएं खेती में नए प्रयोग करें और इसे अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाएं.

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