आश्वासन नहीं, 60 हजार रुपये प्रति एकड़ तत्काल मुआवजा चाहिए.. मंत्रियों के वादे पर भड़के किसान – एग्रीवेट

Team Agrivate
6 Min Read

एग्रीवेट: भयंकर सूखे से जूझ रहे महाराष्ट्र के किसानों के सब्र का बांध टूट गया है. सरकार ने करीब 15 दिन पहले राज्य की 265 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है. इसके बाद से सरकार के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे, पशुपालन मंत्री पंकजा मुंडे, राजस्व मंत्री समेत सांसद-विधायक गांवों में खेतों का दौरा कर रहे हैं. इस दौरान वह किसानों की दीवाली काली नहीं होने देने की बात कहकर दीवाली तक मुआवजा या राहत राशि के लिए रुकने का संकेत दे रहे हैं. इस पर लातूर, परभणी के नाराज किसानों ने राज्य सरकार से कहा है कि अब आश्वासन नहीं चाहिए, बल्कि तत्काल प्रभाव से 60 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा जारी किया जाए.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र को सूखा मुक्त बनाने के लिए राज्य के सभी विभागों को आपसी तालमेल, बेहतर योजना और तेजी के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘पानी रोको, पानी बचाओ’ के संकल्प को प्राथमिकता देते हुए बारिश की हर बूंद को बचाने के लिए जल संरक्षण के काम प्रभावी ढंग से किए जाएं. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जल संरक्षण के कामों के लिए एक एकीकृत कार्ययोजना तैयार की जाए. इसके क्रियान्वयन के लिए एक मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था खड़ी की जाए और कामों की प्रगति पर नजर रखने के लिए तकनीक-आधारित निगरानी प्रणाली विकसित की जाए. पहली बारिश होते ही जल संरक्षण की संरचनाएं पानी रोकने के लिए तैयार रहनी चाहिए ताकि भूजल स्तर में सुधार हो सके.

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद नाराज शेतकारी संगठन के किसानों ने कहा कि पानी कैसे बचाना और इस्तेमाल करना है उन्हें मालूम है. सरकार और सीएम अब ये करें कि तत्काल मुआवजा जारी करें. किसानों ने कहा कि सूखा मुक्त बनाने के लक्ष्य का दावा सीएम कर रहे हैं, वो तो भविष्य की बात है. वर्तमान में जो सूखा है उसके लिए क्या कर रहे हैं वो बताएं. नाराज किसानों ने कहा कि जो भी मंत्री, सांसद सूखा ग्रस्त इलाकों का दौरा कर रहे हैं वो बस आश्वासन दे रहे हैं. लेकिन, आश्वासन से काम नहीं चलेगा. सरकार तत्काल 60 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा जारी करे.

केंद्र सरकार की एक टीम ने सूखे के कारण फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर और बीड जिलों का दौरा किया. टीम ने बर्बाद हुई फसलों का निरीक्षण किया और परेशान किसानों से बातचीत की. कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव मुक्तानंद अग्रवाल के नेतृत्व में टीम ने डेमनी गांव के किसान विलास शिंदे के खेत का निरीक्षण किया. लंबे समय तक बारिश नहीं होने के कारण एक हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में लगी उनकी सोयाबीन की फसल नष्ट हो गई है. यहां पर भी किसानों ने केंद्रीय टीम से तत्काल 60 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा जारी कराने की मांग की.

प्रतिनिधिमंडल में महालनोबिस राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र के उपनिदेशक सुनील कुमार, नीति आयोग के सलाहकार डॉ. जसपाल सिंह, पशुपालन एवं डेयरी विभाग की डॉ. साक्षी भदौरिया, महाराष्ट्र के कृषि सचिव परिमल सिंह और जिलाधिकारी विनय गौड़ा जी सी शामिल थे. प्रतिनिधिमंडल कल रात यहां पहुंचा और उसने संभागीय आयुक्त और स्थानीय अधिकारियों के साथ बातचीत की और खेतों का निरीक्षण शुरू किया. उन्होंने कहा कि अगले तीन से चार दिनों तक विभिन्न स्थानों का दौरा जारी रहेगा. इसके बाद टीम अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.

Share This Article