हरियाणा और पंजाब में अचानक बारिश से मंडी में रखा धान भीगा, तिरपाल उड़े.. किसानों का हंगामा – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: पंजाब और हरियाणा के कई जिलों में हुई बारिश से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है. मंडियों में बिकने के लिए रखी धान की फसल भीग गई है. हरियाणा के अंबाला की मोहड़ा अनाज मंडी में बिकने गया कई क्विंटल धान बारिश से भीग गया. जबकि, कुरुक्षेत्र में तेज आंधी से धान को भीगने से बचाने के लिए बिछाया गया तिरपाल उड़ गया. हरियाणा की कुछ मंडियों में भी अचानक हुई बारिश से धान भीगने पर किसानों ने नाराजगी जताते हुए समय पर खरीद शुरू नहीं होने और नुकसान होने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि है. पंजाब के जालंधर में भी धान के भीगने की शिकायत की गई है. बता दें कि हरियाणा की मंडियों में लगभग 5 लाख टन से ज्यादा धान उठान के लिए पड़ा है.

पंजाब और हरियाणा में मौसम विभाग ने आज बारिश और बादल छाए रहने की चेतावनी दी है. इसके बाद हरियाणा के पंचकूला में घने बादल और तेज हवाओं से मौसम में अचानक बदलाव देखा गया है और कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हुई है. जबकि, अंबाला में भी बारिश दर्ज की गई है. इसी तरह पंजाब के जालंधर समेत कुछ हिस्सों में बारिश के साथ तेज हवाएं चलने से मौसम ठंडा हो गया है. यह स्थिति रबी फसलों के लिए ठीक मानी जा रही है. लेकिन, मंडियों में बिक्री के लिए रखे धान को नुकसान पहुंचा है.

हरियाणा के अंबाला कैंट की मोहड़ा अनाज मंडी में रविवार को हुई बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. मंडी प्रशासन के पुख्ता दावों की पोल उस समय खुल गई जब खुले आसमान के नीचे पड़ा किसानों का धान पानी में भीग गया. अचानक शुरू हुई बारिश से बचने के लिए किसानों ने अपनी उपज बचाने की भरपूर जद्दोजहद की. कई किसानों ने खुद के तिरपाल से धान को ढंकने की कोशिश की, तो कुछ ने शेड के नीचे बची-खुची जगह में बोरियां बचाने की भागदौड़ की. इसके बावजूद, अधिकांश किसानों का धान खुले में ही लावारिस हालत में पड़ा रहा.धान से भरी बोरियों के मुंह खुले होने के कारण धान के ढेर पूरी तरह भीग गए.

किसान नेता रमनदीप सिंह मान ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि कुरुक्षेत्र की मंडियों में ये अभी के हालात हैं. लाखों क्विंटल धान मंडियों में पड़ी है, दस दिन से सरकारी खरीद शुरू होने के बावजूद खरीद की प्रक्रिया सुस्त रही, धान मंडियों में इकट्ठा होता रहा और आज बारिश और तूफान किसानों की धान का सत्यानाश कर देगा. उन्होंने कहा कि किसान के नुकसान के लिए किसकी जिम्मेवारी है.

कुरुक्षेत्र की मंडियों में ये अभी के हालात हैं; लाखों क्विंटल धान मंडियों में पड़ी है, दस दिन से सरकारी खरीद शुरू होने के बावजूद खरीद की प्रक्रिया सुस्त रही, धान मंडियों में इकट्ठा होता रहा और आज बारिश और तूफान किसानों की धान का सत्यानाश कर देगा; किसकी जिम्मेवारी @NayabSainiBJP ?

नाराज धान किसानों का कहना है कि उनकी सूखी हुई फसल अब बारिश के पानी में भीग चुकी है. मौसम साफ होने के बाद उन्हें एक बार फिर से धान सुखाने और फटकने की मशक्कत करनी होगी. इस प्रकार धान के भीगने से उसमें नमी की मात्रा बढ़ेगी, जिससे सरकारी खरीद के दौरान उन्हें नुकसान और परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. नाराज किसानों ने प्रदर्शन करते हुए मंडी प्रशासन से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है.

हरियाणा सरकार के आंकड़ों के अनुसार बीते मंगलवार तक प्रदेश की मंडियों में लगभग 7.35 लाख मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है. अब तक 2.57 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है. अब तक 27,497 मीट्रिक टन धान का उठान पूरा हो चुका है. पिछली बार प्रदेश में 1458 राइस मिलर्स द्वारा सीएमआर का कार्य किया गया था. इस वर्ष 4 अक्टूबर तक 1293 राइस मिलर्स ने पंजीकरण करवाया है.

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