सूखे की चरम स्थिति देख रहे देश के कई इलाके, 90 बांधों में जलस्तर 34 फीसदी गिरा.. पेयजल संकट – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: अल नीनो के चलते देश के कई हिस्सों में कम बारिश दर्ज की गई है. महाराष्ट्र का 74 फीसदी हिस्सा सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है. जबकि, दक्षिण के राज्यों में कई इलाके सूखे का सामना कर रहे हैं. कर्नाटक की 217 तहसीलें सूखाग्रस्त मानी गई हैं. इसी तरह तमिलनाडु के 12 जिलों में सूखे की स्थिति मानी गई है. सूखे का संकट इसलिए और गहराता जा रहा है क्योंकि, तमिलनाडु के 90 बांधों का जलस्तर 34 फीसदी घट गया है. इन बांधों के जरिए कर्नाटक, तमिलनाडु के साथ ही अन्य राज्यों के हिस्सों में पानी पहुंचता है, जो पेयजल और सिंचाई के काम आता है. सूखे की गंभीर होती स्थितियों ने मानव के साथ साथ पशुओं के लिए भी पेयजल संकट खड़ा कर दिया है.

तमिलनाडु के जल संसाधन विभाग और पेयजल बोर्ड के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि राज्य के 90 बांधों में पानी का भंडार उनकी कुल क्षमता के लगभग 34 फीसदी तक गिर गया है. लगातार गर्मी के कारण 63 जलाशयों में पानी उनकी क्षमता के एक-चौथाई से भी कम रह गया है, जिससे सिंचाई और पीने के पानी की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है. जल संसाधन विभाग की देखरेख में आने वाले इन बांधों में कुल मिलाकर 224 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (TMCFT) पानी जमा करने की क्षमता है. हालांकि, अभी इनमें सिर्फ 76.4 TMCFT पानी है, जो कई जिलों में जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव को दिखाता है.

बोर्ड के अनुसार 90 बांधों में से 63 में पानी का भंडार बहुत कम हो गया है और जलस्तर उनकी क्षमता के 25 फीसदी से भी नीचे चला गया है. कुछ बांधों में तो इस्तेमाल लायक पानी बहुत कम बचा है, जिससे जमा हुई गाद और मिट्टी दिखाई देने लगी है. 17 बांधों में पानी का भंडार लगभग 17 फीसदी बताया जा रहा है. जलाशयों में गाद और कचरा जमा होने से स्थिति और खराब हो गई है, क्योंकि उनकी ठीक से सफाई नहीं की गई है. ये जमाव पानी जमा करने की असली क्षमता को कम कर देते हैं, जिससे बारिश बेहतर होने पर भी उपलब्ध पानी की मात्रा सीमित हो सकती है.

अलग-अलग नदियों पर बने ये जलाशय खेती में मदद करते हैं, पीने का पानी सप्लाई करते हैं और बिजली बनाने की जरूरतें पूरी करते हैं. इनमें से कई पश्चिमी घाट में हैं, जहां ये जंगली जानवरों और पक्षियों के लिए पानी के अहम स्रोत भी हैं. पानी के भंडार में भारी कमी के कारण आने वाले उत्तर-पूर्वी मानसून पर निर्भरता बढ़ गई है. जल संसाधन विभाग और पेयजल बोर्ड के अधिकारी बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि जलाशयों में पानी फिर से भर सके और आने वाले महीनों में मांग पूरी की जा सके.

तमिलनाडु में सुपर अल नीनो के प्रभाव के कारण 12 गंभीर प्रभावित जिलों में सूखे की बढ़ती स्थिति को देखते हुए आपातकालीन योजनाएं लागू की गई हैं. ऐसे में जलाशयों में पानी की कमी को लेकर चिंता और बढ़ गई है. कई जिलों में पीने के पानी की जरूरतें पूरी करना बहुत मुश्किल होता जा रहा है. पानी का भंडार कम होने से उन खेतों के लिए भी पानी की उपलब्धता पर खतरा मंडरा रहा है जो बांधों से छोड़े जाने वाले पानी पर निर्भर हैं.

कर्नाटक में आधिकारिक तौर पर 217 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार राज्य के कुल 240 तहसीलों में से 217 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है. राज्य सरकार ने पहले चरण में 101, दूसरे में 23, तीसरे में 53 और 1 अक्टूबर को 40 और नई तहसीलों को सूखाग्रस्त इलाकों की सूची में शामिल कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राज्य का लगभग 91 फीसदी हिस्सा सूखे की चपेट में है, जिसे पिछले 150 वर्षों का सबसे खराब सूखा माना जा रहा है.

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