एग्रीवेट: Cotton Crop 2026: खरीफ सीजन 2026 की नई कपास अब देश की कई मंडियों में पहुंचने लगी है. कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर भारत में नई फसल की आवक धीरे-धीरे बढ़ रही है. अभी देशभर की मंडियों में रोजाना करीब 30 हजार गांठ कपास पहुंच रही है. कारोबारियों का अनुमान है कि अक्टूबर के पहले सप्ताह से आवक और तेज हो सकती है. हालांकि, कपास बाजार में फिलहाल खरीददार ज्यादा उत्साहित नहीं हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास के भाव कमजोर होने और यार्न यानी धागे की मांग सुस्त रहने का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दे रहा है. ऐसे में कारोबारी नई फसल की आवक बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं.
इन राज्यों की मंडियों में पहुंच रही नई कपास
रेडालक्ष्मी ग्रुप के सीएमडी अतुल एस. गनात्रा के मुताबिक, अभी उत्तर भारत की मंडियों में रोजाना करीब 8,000 गांठ कपास की आवक हो रही है. बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में करीब 4,000-4,000 गांठ, मध्य प्रदेश में करीब 5,000 गांठ और गुजरात में लगभग 4,000 गांठ की रोजाना आवक बताई गई है. महाराष्ट्र के खांडेश इलाके में भी नई कपास मंडियों में पहुंचने लगी है. एक गांठ में करीब 170 किलो कपास होती है. कारोबारियों का कहना है कि जैसे-जैसे अक्टूबर का पहला सप्ताह आएगा, नई फसल की आवक में और तेजी देखने को मिल सकती है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार की कमजोरी का घरेलू भाव पर असर
कपास की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी सीधा असर पड़ता है. कारोबारियों के मुताबिक, ICE वायदा बाजार में कपास का भाव कुछ दिन पहले करीब 93 सेंट प्रति पाउंड था, जो अब घटकर लगभग 83 सेंट रह गया है. दूसरी ओर, यार्न के बाजार में भी फिलहाल ज्यादा तेजी नहीं है. धागे की मांग कमजोर रहने और निर्यात कारोबार पर दबाव के कारण कपास खरीदने वाले कारोबारी भी सावधानी बरत रहे हैं. हालांकि, बीज की लागत ज्यादा होने के कारण कच्ची कपास के भाव अभी MSP से ऊपर बने हुए हैं.
रायचूर और महाराष्ट्र में क्या रहे भाव?
रिपोर्ट के अनुसार, रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बू्ब ने बताया कि, बाजार में खरीददारों की संख्या फिलहाल कम है. कारोबारी नई फसल की आवक बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि उन्हें आगे कम कीमत पर कपास खरीदने का मौका मिल सके. शुक्रवार को रायचूर में कच्ची कपास का भाव करीब 9,300 से 9,500 रुपये प्रति क्विंटल रहा. आडोनी में यह करीब 9,200 से 9,500 रुपये प्रति क्विंटल रहा. महाराष्ट्र में ज्यादा नमी के कारण कपास का भाव करीब 8,600 रुपये प्रति क्विंटल बताया गया.
नई कपास की आवक बढ़ने के साथ पुराने स्टॉक को लेकर भी कारोबारियों की चिंता बनी हुई है. कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी CCI ने ICE की कीमतों में गिरावट के बीच इस सप्ताह नीलामी में कपास का भाव करीब 1,600 रुपये प्रति कैंडी घटाया है. अब भाव करीब 67,000 रुपये प्रति कैंडी के आसपास है. इसके बावजूद खरीददार CCI की कम कीमतों पर भी ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. 2025-26 की कपास का भाव कुछ सप्ताह पहले 70,000 रुपये प्रति कैंडी से ऊपर चला गया था, लेकिन अब यह करीब 66,500 से 67,500 रुपये प्रति कैंडी रह गया है. वहीं, नई फसल की कपास करीब 66,000 से 67,000 रुपये प्रति कैंडी के स्तर पर उपलब्ध है.
कपास की बुवाई का रकबा थोड़ा कम
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 18 सितंबर तक देश में कपास की बुवाई का रकबा 109.61 लाख हेक्टेयर रहा. पिछले साल इसी अवधि में यह 110.60 लाख हेक्टेयर था. यानी इस बार रकबे में मामूली कमी आई है. हालांकि, कुछ राज्यों में कपास का रकबा बढ़ा है. तेलंगाना में पिछले साल के मुकाबले 5.45 फीसदी, गुजरात में 3.24 फीसदी और मध्य प्रदेश में 2.28 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. दूसरी ओर, कई अन्य राज्यों में कपास का रकबा पिछले साल की तुलना में कम रहा है.