हिसार प्याज-3 की देशभर में बढ़ी मांग, असम तक पहुंचेगा हरियाणा का बीज, HAU ने की बड़ी साझेदारी – एग्रीवेट

Team Agrivate
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हिसार प्याज-3 की देशभर में बढ़ी मांग, असम तक पहुंचेगा हरियाणा का बीज, HAU ने की बड़ी साझेदारी - एग्रीवेट - हिसार प्याज-3 देशभर

एग्रीवेट: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) द्वारा विकसित उन्नत प्याज किस्म हिसार प्याज-3 (HOS-3) अब पूर्वोत्तर भारत में भी अपनी पहचान बनाने जा रही है. विश्वविद्यालय ने इस किस्म के बीजों को किसानों तक पहुंचाने के लिए गुवाहाटी स्थित निजी कंपनी मैजेस्टिक इम्पेक्स के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं. इससे असम सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र के किसानों को उच्च क्वालिटी वाले प्याज बीज उपलब्ध हो सकेंगे.

हकृवि के कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज ने कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक लगातार अलग-अलग फसलों की उन्नत किस्में विकसित कर रहे हैं. इन किस्मों की मांग अब हरियाणा और आसपास के राज्यों तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश के अन्य हिस्सों से भी बढ़ रही है. उनका कहना है कि किसानों को प्रमाणित और विश्वसनीय बीज उपलब्ध कराकर कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ उनकी आय में भी सुधार किया जा सकता है.

कुलपति की उपस्थिति में हुए इस समझौते पर मैजेस्टिक इम्पेक्स, गुवाहाटी की ओर से एग्जीक्यूटिव मेंबर नीरज अग्रवाल और विश्वविद्यालय की ओर से अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने हस्ताक्षर किए.

अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि हिसार प्याज-3 एक उन्नत किस्म है, जिसके कंद तांबे जैसे चमकीले भूरे-लाल रंग के और गोलाकार होते हैं. इस किस्म का तीखापन अपेक्षाकृत कम है, जबकि इसकी भंडारण क्षमता काफी बेहतर मानी जाती है. प्याज में कुल घुलनशील तत्वों की मात्रा करीब 14 प्रतिशत होती है, जिससे इसकी क्वालिटी और बाजार मांग बढ़ती है.

उन्होंने बताया कि इस किस्म में फूल निकलने की समस्या और भंडारण के दौरान अंकुरण बहुत कम होता है. साथ ही गुलाबी दाग, प्याज येलो ड्वार्फ वायरस और चूरड़ा कीट का प्रकोप भी न्यूनतम पाया गया है.

हिसार प्याज-3 की फसल 130 से 140 दिनों में तैयार हो जाती है. विश्वविद्यालय के अनुसार, इसकी पैदावार लगभग 125 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच सकती है. वहीं HOS-3 किस्म का औसत उत्पादन 320 से 350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक दर्ज किया गया है. भंडारण के दौरान इसमें केवल 3.7 प्रतिशत बोल्टिंग और 7.2 प्रतिशत स्प्राउटिंग देखी गई है, जो इसे व्यापारिक खेती के लिए बेहद उपयुक्त बनाती है.

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और लंबी भंडारण अवधि के कारण यह किस्म किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है. असम में इसके विस्तार से पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्याज उत्पादकों को भी आधुनिक और बेहतर किस्म का विकल्प मिलेगा.

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