आंध्र में सूखे से किसानों की कमाई पर संकट, केंद्र से 200 दिन का रोजगार और जल्द फसल बीमा भुगतान की उठी मांग – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: आंध्र प्रदेश में सूखे की मार झेल रहे किसानों को राहत दिलाने के लिए मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने केंद्र सरकार से विशेष सहायता मांगी है. उन्होंने ग्रामीण रोजगार योजना के तहत रोजगार की गारंटी 125 दिन से बढ़ाकर 200 दिन करने की मांग की है. साथ ही किसानों को फसल बीमा का लंबित मुआवजा जल्द जारी करने और कृषि कार्यों को भी इस योजना के दायरे में शामिल करने का आग्रह किया है. मुख्यमंत्री नायडू ने बुधवार को राज्य के सूखा प्रभावित जिलों का दौरा करने वाली अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (IMCT) के साथ बैठक में ये मांगें रखीं. केंद्रीय टीम ने 2 और 3 नवंबर को कुरनूल, नंदयाल, अनंतपुर और श्री सत्य साई जिलों का दौरा कर फसलों के नुकसान और किसानों की स्थिति का जायजा लिया था.

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय टीम को बताया कि इस साल राज्य में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है, जिसका खरीफ फसलों पर गंभीर असर पड़ा है. खासकर रायलसीमा क्षेत्र के कई जिले सूखे की चपेट में हैं. उन्होंने कहा कि अनंतपुर में देश में दूसरी सबसे कम बारिश दर्ज की गई है.

नायडू के मुताबिक, राज्य के 21 जिलों के 412 मंडलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार प्रभावित किसानों के नुकसान का आकलन कर रही है और एक सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार को विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी. उन्होंने कहा कि राज्य के तटीय इलाकों में चक्रवात से नुकसान हुआ है, जबकि दूसरे क्षेत्रों में अल नीनो और बारिश की कमी के कारण सूखे की गंभीर स्थिति बनी हुई है.

नायडू ने केंद्र से विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G योजना के तहत न्यूनतम रोजगार अवधि बढ़ाकर 200 दिन करने की सिफारिश करने को कहा. फिलहाल इस योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्त वर्ष में 125 दिन के मजदूरी रोजगार की गारंटी मिलती है.

मुख्यमंत्री ने कृषि से जुड़े कामों को भी इस योजना में शामिल करने की मांग की. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में खेतों पर अतिरिक्त श्रमिकों की जरूरत पड़ती है. रोजगार के दिनों की संख्या बढ़ने से किसानों को खेती के लिए मजदूर मिल सकेंगे और ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त रोजगार भी मिलेगा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि सूखे के कारण किसानों की आमदनी बुरी तरह प्रभावित हुई है. फसल खराब होने से उनके सामने कृषि कर्ज चुकाने का संकट खड़ा हो गया है. उन्होंने केंद्र से प्रभावित किसानों के कृषि ऋणों के पुनर्गठन और कर्ज चुकाने की अवधि बढ़ाने में मदद करने का आग्रह किया.

नायडू ने पिछली सूखा परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि रायलसीमा में 10 एकड़ जमीन के मालिक किसानों को भी राशन कार्ड जारी करने की नौबत आ गई थी. उन्होंने केंद्रीय टीम से पात्र परिवारों को सूखा कार्ड जारी करने की संभावना पर विचार करने को कहा. इससे प्रभावित परिवारों को केंद्र की मदद से जरूरी खाद्य सामग्री रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जा सकेगी.

मुख्यमंत्री ने लंबित फसल बीमा दावों का जल्द निपटारा करने पर जोर दिया. उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि बीमा मुआवजे की राशि बिना देरी सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचाई जाए, ताकि किसान अगली फसल की बुवाई की तैयारी कर सकें. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार भी प्रभावित किसानों को इनपुट सब्सिडी दे रही है.

नायडू ने बताया कि बारिश की कमी के कारण कई इलाकों में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है. नए बोरवेल खुदवाने के बावजूद कई जगह पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है. उन्होंने केंद्र से जल जीवन मिशन के विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संसाधनों के विकास एवं आपस में जोड़ने जैसी दीर्घकालिक योजनाओं में सहयोग मांगा.

मुख्यमंत्री ने सूखा प्रभावित इलाकों में पशुओं के लिए चारे और पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जरूरत भी बताई. उन्होंने कहा कि सूखे का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है, इससे पशुपालन और ग्रामीण परिवारों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है.

केंद्रीय टीम ने मुख्यमंत्री को बताया कि वह अपने दौरे और किसानों से बातचीत के आधार पर 15 दिनों के भीतर केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी. आंध्र प्रदेश की ओर से मांगी गई सहायता पर आगे का फैसला इस रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा.

नायडू ने केंद्र से राज्य के लिए विशेष सहायता की मांग करते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में गंभीर सूखे और तटीय जिलों में चक्रवात से हुई तबाही का असर एक साथ देखने को मिल रहा है. इससे किसानों और दूसरे प्रभावित क्षेत्रों को अतिरिक्त राहत की जरूरत है. (पीटीआई)

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