एग्रीवेट: Tadoba Tiger Reserve: बाघों को सुरक्षित रखने और जंगल में उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए महाराष्ट्र में नई पहल की गई है. राज्य के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों के लिए बनाए गए जलस्रोतों में पानी का स्तर नियंत्रित करने के लिए सेंसर आधारित सिस्टम शुरू किया गया है. यह तकनीक पानी का स्तर घटने या बढ़ने के हिसाब से पंप को अपने आप चालू और बंद कर सकती है. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और महाराष्ट्र सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में फिलहाल 444 बाघ हैं. वहीं, महाराष्ट्र में बाघों की मौत के आंकड़ों को लेकर राज्य और राष्ट्रीय डेटाबेस में अंतर भी सामने आया है. ऐसे में बाघों की सुरक्षा, पानी की उपलब्धता और उनकी मौतों की निगरानी को बेहतर बनाना वन्यजीव संरक्षण के लिए अहम हो गया है.
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में स्थित ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व (TATR) ने वन्यजीवों के जलस्रोतों के प्रबंधन के लिए सेंसर आधारित सिस्टम शुरू किया है. अधिकारियों के मुताबिक, इस पायलट परियोजना का उद्देश्य वॉटरहोल में पानी का स्तर नियंत्रित रखना, पानी की बर्बादी कम करना और जंगली जानवरों के लिए नियमित रूप से पानी उपलब्ध कराना है. PTI के अनुसार, टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. प्रभु नाथ शुक्ला ने इसे वन्यजीवों के जलस्रोत प्रबंधन की अपनी तरह की पहली पहल बताया है. इस सिस्टम में पानी के स्तर के अनुसार पंप अपने आप चालू और बंद हो जाता है. इससे जलस्रोतों को जरूरत के मुताबिक भरने में मदद मिलेगी.
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और महाराष्ट्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 444 बाघ हैं. हालांकि, बाघों की मौत के आंकड़ों को लेकर सरकारी रिकॉर्ड में अंतर सामने आया है. बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ में दाखिल एक जवाब के मुताबिक, वर्ष 2021 से जनवरी 2026 तक महाराष्ट्र के रिकॉर्ड में 184 बाघों की मौत दर्ज है, जबकि NTCA के पोर्टल पर 167 मौतें दिखाई गई हैं. रिकॉर्ड के मिलान में राज्य के आंकड़ों में दर्ज 20 मौतें राष्ट्रीय डेटाबेस में नहीं मिलीं, जबकि राष्ट्रीय पोर्टल पर दर्ज चार मौतें राज्य के रिकॉर्ड में नहीं थीं. यह मामला बाघों की मौत और संरक्षण की निगरानी से जुड़ी स्वयं संज्ञान वाली जनहित याचिका में सामने आया है. अदालत ने NTCA को इन दावों पर तीन सप्ताह के भीतर लिखित जवाब देने का निर्देश दिया है.
महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश रामचंद्र नाइक ने विधानसभा में लिखित जवाब में बताया कि वर्ष 2025 के दौरान राज्य में अलग-अलग कारणों से 41 बाघों की मौत हुई. इनमें 28 मौतें प्राकृतिक कारणों से हुईं, जबकि आठ बाघ दुर्घटनाओं में मारे गए. चार की मौत करंट लगने से हुई और एक बाघ की मौत शिकार के कारण हुई. इन आंकड़ों से साफ है कि बाघों की सुरक्षा के लिए केवल प्राकृतिक आवास और पानी की व्यवस्था ही नहीं, बल्कि दुर्घटनाओं, बिजली के करंट और अवैध शिकार से बचाव भी जरूरी है. मौतों के आंकड़ों का सही मिलान भी संरक्षण की योजनाएं बनाने में अहम भूमिका निभाता है.
वन मंत्री गणेश नाइक ने बताया कि रेलवे दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मौत रोकने के लिए जंगलों से गुजरने वाली प्रस्तावित रेल लाइनों पर अंडरपास और ओवरपास बनाने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा, वन क्षेत्रों से गुजरने वाले रेल मार्गों पर ट्रेनों की गति 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक सीमित रखने का प्रावधान बताया गया है. ताडोबा में सेंसर आधारित जल प्रबंधन, बाघों की मौतों के रिकॉर्ड में पारदर्शिता और रेल दुर्घटनाओं को रोकने के उपाय वन्यजीव संरक्षण के अलग-अलग पहलू हैं. यदि इन व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो बाघों के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर बनाने और उनकी सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है.