एग्रीवेट: Maize Production Decline: महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई इलाकों में पड़े सूखे का असर अब सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रह सकता. इसका असर मुर्गी पालन करने वाले किसानों की जेब पर भी पड़ने की आशंका है. दरअसल, मुर्गियों के दाने में इस्तेमाल होने वाले मक्का और सोयाबीन की पैदावार इस साल घट सकती है.
अगर ऐसा हुआ, तो बाजार में इनकी कीमतें बढ़ सकती हैं और मुर्गी पालकों को दाना खरीदने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं. खरीफ 2026 के शुरुआती अनुमानों में मक्का और सोयाबीन, दोनों के उत्पादन में गिरावट की बात सामने आई है. हालांकि, फसल की कटाई और बाजार में नई उपज आने के बाद ही असली स्थिति साफ होगी.
पशुपालन क्षेत्र से जुड़े संगठन सीएलएफएमए ऑफ इंडिया के खरीफ 2026 के अनुमान के मुताबिक, देश में मक्का का उत्पादन करीब 232.09 लाख टन रह सकता है. बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, यह पिछले साल के अनुमान से 16.75 फीसदी कम है. इस बार मक्का की खेती का रकबा भी घटा है. पिछले साल के मुकाबले करीब 9.01 फीसदी कम जमीन पर मक्का लगाया गया है.
इस साल इसका रकबा करीब 89.06 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है. संगठन के अध्यक्ष दिव्य कुमार गुलाटी के मुताबिक, मक्का उत्पादन में गिरावट मुर्गी पालन के कारोबार के लिए चिंता की बात है, क्योंकि मुर्गियों के दाने में मक्का का काफी इस्तेमाल होता है.
मक्का उत्पादन में सबसे ज्यादा चिंता महाराष्ट्र और कर्नाटक को लेकर है. इन दोनों राज्यों के कई इलाकों में बारिश की कमी और सूखे जैसे हालात ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है. अनुमान के मुताबिक, महाराष्ट्र में मक्का उत्पादन करीब 22.8 लाख टन रह सकता है. यह पिछले साल के मुकाबले 24.22 फीसदी कम है. वहीं, कर्नाटक में मक्का की पैदावार करीब 34 लाख टन रहने का अनुमान है. यहां उत्पादन में 33.37 फीसदी तक गिरावट आ सकती है.
मक्का के साथ सोयाबीन की फसल को लेकर भी चिंता बढ़ रही है. सीएलएफएमए के अनुमान के मुताबिक, देश में सोयाबीन उत्पादन करीब 124.06 लाख टन रह सकता है. यह पिछले साल के सरकारी अनुमान 128.59 लाख टन से 3.52 फीसदी कम है. महाराष्ट्र में सोयाबीन की पैदावार करीब 46.5 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल से 3.99 फीसदी कम है. वहीं, मध्य प्रदेश में उत्पादन करीब 53.2 लाख टन रह सकता है. इस अनुमान के मुताबिक, यहां भी 10.43 फीसदी की गिरावट आ सकती है.
हालांकि, सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी सोपा ने अलग अनुमान जारी किया है. उसके मुताबिक, देश में सोयाबीन उत्पादन करीब 107.93 लाख टन रह सकता है, जो पिछले साल के 110.25 लाख टन से 2.11 फीसदी कम है. दोनों संगठनों के अनुमान अलग हैं, लेकिन इनमें कुल उत्पादन घटने की आशंका जताई गई है.
मुर्गी पालन में सबसे ज्यादा खर्च दाने पर होता है. सीएलएफएमए के मुताबिक, मुर्गी पालन की कुल लागत का करीब 65 से 70 फीसदी हिस्सा दाने पर खर्च होता है. ऐसे में अगर मक्का और सोयाबीन महंगे होते हैं, तो मुर्गी पालकों का खर्च बढ़ सकता है. खासकर छोटे किसानों के लिए यह परेशानी की बात हो सकती है, क्योंकि दाने की कीमत बढ़ने से उनकी बचत कम हो सकती है. इसका असर मुर्गी पालन के कारोबार और उत्पादन पर भी पड़ सकता है.
फिलहाल मक्का और सोयाबीन के उत्पादन से जुड़े ये शुरुआती अनुमान हैं. फसल की कटाई पूरी होने और मंडियों में नई उपज पहुंचने के बाद तस्वीर ज्यादा साफ होगी. ऐसे में मुर्गी पालन करने वाले किसानों को दाने की कीमतों पर नजर रखनी चाहिए. साथ ही मक्का और सोयाबीन की उपलब्धता को देखते हुए खरीदारी की योजना बनाना बेहतर रहेगा.