5500 रुपये प्रति टन गन्ना भाव की मांग पर कर्नाटक बंद, सड़क पर किसान.. मुख्यमंत्री ने की खास अपील – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: कर्नाटक में गन्ने का भाव 5,500 रुपये प्रति टन करने की मांग को लेकर किसानों ने 31 अक्टूबर को बंद बुलाया. इसका असर बेलगावी जिले के कई कस्बों में देखने को मिला. प्रदर्शन के दौरान किसानों ने बसों को रोक दिया, जिससे यातायात और सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ. इस दौरान पुलिस और किसानों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई. इसके बाद किसान टूरिस्ट बंगले के सामने जुटे और केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. उन्होंने गन्ने का भाव बढ़ाने की अपनी मांग दोहराई.

बंद के दौरान कई जगहों पर दुकानें भी बंद रहीं. बेलगावी जिले के हुक्केरी, रायबाग, मुडलगी, अथानी, निपानी और चिक्कोडी तालुक मुख्यालयों के अलावा कई होबली केंद्रों में व्यापारिक गतिविधियां लगभग ठप रहीं. प्रदर्शन के दौरान किसानों ने जिले के कई स्थानों पर सड़कें जाम कर दीं. इससे मंदिरों की ओर जाने वाले रास्ते बंद होने के कारण श्रद्धालुओं को भी परेशानी हुई. वहीं, धारवाड़, बागलकोट, विजयपुरा, हावेरी और गडग जिलों में किसानों का विरोध प्रदर्शन ज्यादातर सांकेतिक रहा.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गन्ने के भाव को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों से 26 अक्टूबर की बैठक में बनी सहमति का पालन करने की अपील की है. उन्होंने किसानों से शांति और धैर्य बनाए रखने को कहा. मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार चीनी की कीमतों में बदलाव नहीं करती, तब तक चीनी मिलों के लिए गन्ने की खरीद का भाव बढ़ाना मुश्किल है.

सीएम शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने इस मामले में जल्द फैसला लेने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से संपर्क किया है. उन्होंने कहा कि 26 अक्टूबर की बैठक में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भरोसा दिया था कि केंद्र सरकार चीनी का उचित भाव तय करेगी. इसके बाद चीनी की कीमत में बढ़ोतरी से मिलने वाला पूरा फायदा चीनी मिलें किसानों को देंगी. मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस बैठक में किसान संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए थे.

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि सरकार बैठक में लिए गए फैसले को लागू करेगी. उन्होंने किसान नेताओं से अपील की कि वे बैठक में बनी सहमति पर कायम रहें. उन्होंने कहा कि चीनी मिलें किसानों को गन्ने का जो भी भाव देने का फैसला करेंगी, यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी होगी कि किसानों को उनका उचित भुगतान मिले.

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से चीनी की कीमत बढ़ाकर कम से कम 50 रुपये प्रति किलो करने की मांग दोहराई. उन्होंने कहा कि इससे चीनी मिलों को किसानों को गन्ने का बेहतर भाव देने में मदद मिलेगी. शिवकुमार ने कहा कि करीब आठ साल से चीनी की कीमत में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं हुई है. ऐसे में मिलों के लिए किसानों को अच्छा भाव देना मुश्किल हो रहा है. उन्होंने कहा कि किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए चीनी की कीमत बढ़ाना जरूरी है.

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