एग्रीवेट: इस साल देश में खरीफ फसलों की बुवाई पिछले साल के मुकाबले 1 फीसदी से थोड़ा ज्यादा घटी है. हालांकि, मॉनसून की कमी के बावजूद कुल खरीफ रकबा पिछले पांच साल के औसत से थोड़ा ज्यादा रहा है. इससे संकेत मिलता है कि मौसम की पहले से जानकारी मिलने पर किसान फसल और बुवाई की रणनीति में बदलाव कर रहे हैं. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार तक खरीफ फसलों का कुल रकबा 1,107 लाख हेक्टेयर रहा. यह सामान्य रकबे 1,104 लाख हेक्टेयर से करीब 3 लाख हेक्टेयर ज्यादा है.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जून से 26 सितंबर के बीच देश में मॉनसून बारिश सामान्य से 12 फीसदी कम रही है. वहीं, 2025 में इसी अवधि के दौरान सामान्य से 8 फीसदी ज्यादा बारिश हुई थी. उस समय खरीफ फसलों का कुल रकबा 1,121 लाख हेक्टेयर रहा था. ऐसे देश में खरीफ की सबसे प्रमुख और ज्यादा पानी की जरूरत वाली फसल धान का रकबा इस साल पिछले साल के मुकाबले 3.6 फीसदी घटा है. हालांकि, इसके बावजूद धान की बुवाई सामान्य रकबे से 4.6 फीसदी ज्यादा रही. इसी तरह गन्ने का रकबा भी सामान्य से ज्यादा दर्ज किया गया है. इससे संकेत मिलता है कि किसान बेहतर आमदनी देने वाली फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं. हालांकि, इन फसलों के लिए किसानों को भूजल का ज्यादा इस्तेमाल करना पड़ रहा है. इससे सिंचाई की लागत बढ़ने का जोखिम भी बना हुआ है.
मॉनसून में बारिश की कमी का असली असर फसलों की पैदावार में देखने को मिल सकता है. केंद्रीय कृषि मंत्रालय जल्द ही खरीफ फसलों की पैदावार का शुरुआती अनुमान जारी कर सकता है. बारिश की कमी और असमान वितरण से दलहन, तिलहन, कपास और मोटे अनाज की पैदावार पर चिंता बढ़ी है. इनमें अरहर, सोयाबीन, मूंगफली, बाजरा और मक्का प्रमुख फसलें हैं.
बारिश की कमी का असर खास तौर पर मॉनसून कोर जोन में पड़ सकता है. इसमें मध्य भारत और बिहार के बड़े हिस्से शामिल हैं. इन इलाकों में खेती के लिए मौसमी बारिश पर ज्यादा निर्भरता है, क्योंकि सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं है. वहीं, बिहार और असम के कुछ हिस्सों में बाढ़, जबकि महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ इलाकों में सूखे की स्थिति से खरीफ फसलों के कुल उत्पादन पर असर पड़ सकता है. मॉनसून की कमी से मिट्टी में नमी कम रहने और सिंचाई के लिए पानी की कमी की वजह से रबी फसलों पर भी चिंता बढ़ गई है. इसे देखते हुए कृषि मंत्रालय सोमवार से शुरू होने वाली दो दिवसीय बैठक में फसलों को बचाने के लिए वैकल्पिक उपायों पर चर्चा करेगा.