साल के अंत तक बेहद ताकतवर हो सकता है अल नीनो, दुनिया में सूखा-बाढ़ और भीषण गर्मी का खतरा – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: विश्व मौसम संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि मौजूदा अल नीनो का असर इस साल के अंत तक असाधारण रूप से तेज हो सकता है. इससे दुनिया में बारिश और तापमान का पैटर्न बिगड़ सकता है. इसके चलते कई क्षेत्रों में सूखा, बाढ़ और भीषण गर्मी का खतरा बढ़ सकता है. इसका असर 2027 तक भी बना रह सकता है. संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी WMO के ताजा ग्लोबल सीजनल क्लाइमेट अपडेट के मुताबिक, नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के दौरान उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से 3.8 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा हो सकता है. इसी क्षेत्र में अल नीनो की स्थिति बनती है. एजेंसी का अनुमान है कि यह घटना इस साल के अंत तक अपने चरम पर पहुंच सकती है.

WMO की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने बुधवार को कहा कि तापमान में संभावित बढ़ोतरी  पिछले चार दशकों से इस्तेमाल किए जा रहे निगरानी चार्ट के दायरे से भी बाहर है. उन्होंने कमजोर और प्रभावित समुदायों को इसके संभावित असर से बचाने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत बताई.

अल नीनो एक प्राकृतिक मौसमी घटना है. इसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इससे हवा के बहाव और बारिश के पैटर्न में बदलाव आता है. इसका असर दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों के तापमान और बारिश पर पड़ता है. विश्व मौसम संगठन (WMO) के मुताबिक, समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 0.5 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा होने पर अल नीनो की स्थिति मानी जाती है.

WMO के मुताबिक, इस बार अल नीनो की स्थिति मजबूत होने से कई क्षेत्रों में मौसम से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं. हालांकि, इसका असर हर जगह एक जैसा नहीं होगा. यह स्थानीय जलवायु और मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा. मौसम संगठन ने अनुमान जताया है कि पूर्वी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में अक्टूबर से दिसंबर के बारिश के मौसम के दौरान सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है. इससे वहां बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका है.

अल नीनो के असर से दुनिया के कई क्षेत्रों में मौसम बदलने की आशंका है. विश्व मौसम संगठन (WMO) के मुताबिक, नवंबर से दक्षिणी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है. इससे फसलों की पैदावार, पानी की उपलब्धता और लोगों की आजीविका पर असर पड़ सकता है. वहीं, दक्षिण-पूर्व एशिया में सामान्य से ज्यादा गर्मी और कम बारिश होने का अनुमान है. इससे खेती और जल आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है. साथ ही, जंगलों में आग लगने और धुएं के फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है. WMO के पूर्वानुमान के अनुसार, अमेरिका महाद्वीप के कुछ हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है. दूसरी ओर, मध्य अमेरिका, दक्षिणी कैरेबियाई क्षेत्र और अमेजन बेसिन के कुछ हिस्सों में सूखे का खतरा बढ़ने की आशंका है.

बारिश और तापमान में बदलाव का असर खेती, बिजली उत्पादन, जल प्रबंधन और लोगों की सेहत  पर पड़ सकता है. सूखे से फसलों की पैदावार घट सकती है और पानी की कमी बढ़ सकती है. वहीं, बहुत ज्यादा बारिश से फसलों, बुनियादी ढांचे और लोगों की आजीविका को नुकसान पहुंच सकता है. वहीं, WMO ने सरकारों और राहत एजेंसियों से मौसमी पूर्वानुमानों और समय रहते चेतावनी देने वाली प्रणालियों का इस्तेमाल करने की अपील की है. इसका मकसद अल नीनो के संभावित असर से निपटने के लिए पहले से तैयारी करना है.

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