एग्रीवेट: Bharat International Rice Conference 2026: इस साल बासमती चावल की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर सामने आई है. देश में बासमती चावल की पैदावार पिछले साल के मुकाबले 5 से 10 फीसदी तक बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह अच्छी बारिश और फसल के लिए अनुकूल मौसम बताया जा रहा है.
नई दिल्ली में आयोजित भारत अंतर्राष्ट्रीय चावल सम्मेलन 2026 के दौरान बासमती चावल उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी है. अच्छी पैदावार से देश में बासमती चावल की उपलब्धता बढ़ सकती है. वहीं, विदेशों में भारतीय बासमती की बढ़ती मांग को देखते हुए निर्यात कारोबार को भी फायदा मिलने की उम्मीद है.
इस साल बासमती चावल की अच्छी पैदावार के पीछे मौसम की बड़ी भूमिका मानी जा रही है. बासमती आईआरईएफ के अध्यक्ष और चमन लाल सेतिया एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के संयुक्त प्रबंध निदेशक राजीव सेतिया के मुताबिक, इस बार मॉनसून के दौरान बारिश अच्छी रही. इसके बाद भी कई इलाकों में बारिश होने से फसल को फायदा मिला. उन्होंने बताया कि खेतों में पर्याप्त नमी रहने से बासमती की फसल की बढ़वार अच्छी हुई है. इसी वजह से पिछले साल के मुकाबले इस बार उत्पादन ज्यादा रहने की उम्मीद है.
नई दिल्ली में 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित भारत अंतर्राष्ट्रीय चावल सम्मेलन 2026 के दौरान राजीव सेतिया ने मीडिया से बातचीत में बासमती उत्पादन को लेकर अपनी उम्मीदें साझा कीं. उन्होंने कहा कि, इस साल बासमती चावल की पैदावार पिछले साल की तुलना में करीब 5 से 10 फीसदी अधिक रह सकती है.
भारत का बासमती चावल अपनी खुशबू, लंबे दानों और स्वाद के लिए दुनिया भर में पसंद किया जाता है. अब इसकी मांग पुराने बाजारों के अलावा दूसरे देशों में भी बढ़ने की उम्मीद है. राजीव सेतिया के मुताबिक, यूरोप और अमेरिका जैसे देशों में भारतीय खाने की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. इससे वहां बासमती चावल की मांग को भी फायदा मिल रहा है. उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी फिलहाल दुनिया के 96 देशों में बासमती चावल का निर्यात करती है.
भारत दुनिया के प्रमुख बासमती चावल उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है. देश से हर साल बड़ी मात्रा में बासमती चावल विदेश भेजा जाता है. भारतीय बासमती को जीआई यानी भौगोलिक पहचान भी मिली हुई है. यह पहचान बताती है कि, असली बासमती चावल देश के कुछ खास इलाकों में उगाया जाता है और उसकी अपनी अलग पहचान है. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय बासमती को पहचान बनाए रखने में मदद मिलती है.
अगर इस साल बासमती चावल का उत्पादन अनुमान के मुताबिक बढ़ता है, तो बाजार में इसकी उपलब्धता भी बढ़ेगी. इससे निर्यातकों को विदेशों में चावल भेजने के लिए ज्यादा माल मिल सकता है. हालांकि, किसानों को इसका कितना फायदा होगा, यह मंडियों में मिलने वाले भाव और खरीद की मांग पर निर्भर करेगा. ज्यादा पैदावार होने का मतलब यह नहीं है कि किसानों को अपने आप ज्यादा कीमत मिलेगी.